नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के इस काल मे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने फिलहाल परीक्षाओं से संबंधित फैसला विश्वविद्यालयों के ऊपर छोड़ दिया है। विश्वविद्यालय स्थानीय परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए परीक्षाएं कराने या फिर छात्रों को सीधे प्रमोट करने का फैसला ले सकेंगे। अभी तक जो स्थिति है, उसमें ज्यादातर विश्वविद्यालयों ने अंतिम वर्ष को छोड़कर बाकी सभी छात्र – छात्राओं को बिना परीक्षा दिए ही अगली कक्षाओं में प्रमोट करने की तैयारी शुरू कर दी है। जिसके लिए विश्वविद्यालयों ने यूजीसी की ओर से पिछले वर्ष परीक्षाओं को लेकर निर्देशित गाइडलाइन को ही आधार बनाया है।
यूजीसी के सचिव डॉ. रजनीश जैन ने बताया कि विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्थान होते हैं। ऐसे में उन्हें परीक्षाओं और शैक्षणिक सत्र आदि को लेकर अपने स्तर पर कोई भी फैसला लेने का स्वतंत्रता अधिकार है। यूजीसी का यह भी कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रभाव देश के अलग-अलग क्षेत्रों में कम और ज्यादा है। ऐसे में परीक्षाओं को लेकर इस वर्ष कोई स्टैंडर्ड गाइडलाइन अभी नहीं बनाई गई है। इस बीच, विश्वविद्यालयों ने स्नातक के पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को आंतरिक आकलन या फिर पिछले साल के प्रदर्शन के आधार पर अंक प्रदान करके प्रमोट करने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही अंतिम वर्ष की परीक्षाएं जुलाई-अगस्त में कराने की योजना पर भी अमल किया जा रहा है। हालांकि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर कोई भी फैसला जून के पहले हफ्ते में कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।

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