दिगालीचौड़ के रवि शंकर जोशी ने पूरी की पीएचडी, शिक्षा जगत में हासिल की नई उपलब्धि
चंपावत। सीमांत क्षेत्र दिगालीचौड़ के युवा शिक्षाविद एवं चंपावत परिसर में प्राध्यापक डॉ. रवि शंकर जोशी ने 31 जुलाई 2026 को पीएचडी की मौखिकी (वाइवा-वोसे) सफलतापूर्वक पूर्ण कर शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही उनका शोध कार्य विधिवत पूर्ण हो गया।
डॉ. जोशी का शोध शिक्षाशास्त्र (Education) विषय में “Study of Career Aspiration in Relation to Self-Efficacy and Socio-Economic Status of Senior Secondary School Students” विषय पर आधारित है। शोध में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यार्थियों की करियर आकांक्षाओं, आत्म-प्रभावकारिता और सामाजिक-आर्थिक स्तर के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया है।
इस शोध कार्य का मार्गदर्शन डॉ. माया जोशी एवं प्रो. भीमा मनराल ने शोध निदेशक के रूप में किया। डॉ. जोशी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार और गुरुजनों को देते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से अपने बड़े भाई एवं समाजसेवी दीपक जोशी के सहयोग, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन को इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. देवेंद्र सिंह बिष्ट, चंपावत परिसर के निदेशक प्रो. प्रवीण सिंह बिष्ट तथा परिसर के सभी शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी सहयोग के लिए आभार जताया।
डॉ. रवि शंकर जोशी की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल शैक्षणिक भविष्य की कामना की।

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