April 24, 2026

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अरबों खर्च के बाद भी टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात हुआ बेहाल, स्वाला डेंजर जोन बना सबसे बड़ा खतरा 

अरबों खर्च के बाद भी टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात हुआ बेहाल, स्वाला डेंजर जोन बना सबसे बड़ा खतरा

…चंपावत व पिथौरागढ़ की जीवनरेखा इस मार्ग पर बरसात में ठप पड़ती आवाजाही से आम जनता के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा भी जोखिम में; अधिकारियों के लाख प्रयास भी नहीं दे पाए स्थाई समाधान

चंपावत। अरबों रुपए की लागत से बने राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात सुगमता का सपना अब भी अधूरा है। खासकर स्वाला डेंजर जोन में हालात इतने नाजुक हैं कि सामान्य बरसात में भी वाहनों की रफ्तार थम जाती है। यह मार्ग न सिर्फ चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों की जीवनरेखा है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अहम है।बरसात आते ही हाईवे इस खतरनाक मोड़ पर ठप होने लगता है। हालात इतने गंभीर हैं कि जिलाधिकारी मनीष कुमार को कई बार आधी रात में मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर मलबा हटवाना पड़ा है, ताकि आवागमन बहाल हो सके। डीएम के लगातार निरीक्षण के बावजूद, राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के पास इस समस्या का स्थायी हल नहीं है।जानकारों का कहना है कि पहाड़ी पर ढलान ट्रीटमेंट कार्य शुरू करने से पहले ऊपर जमा मलबा हटाना जरूरी था, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। नतीजतन, करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी समस्या जस की तस है। हाल ही में सामान्य मौसम में ही यह ट्रीटमेंट एक झटके में ढह गया और पहाड़ी के साथ रोड भी बहकर चला गया।स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके थे, तो इतने बड़े बजट का काम बिना मूल समस्या हटाए क्यों किया गया? अब यह मामला जांच का विषय बनता जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं—कब तक चंपावत और पिथौरागढ़ के निवासी इस यातायात संकट का सामना करेंगे?

फोटो: ड्रोन से लिया गया स्वाला डेंजर जोन का दृश्य एवं सड़क बंद होते ही मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी।

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