नई टेंडर नीति के विरोध में उतरे ठेकेदार, टेंडर प्रक्रिया का हिस्सा न बनने की चेतावनी
-चंपावत लोनिवि परिसर में नई टेंडर नीति के विरूद्ध नारेबाजी, सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग
चंपावत ।
लोक निर्माण विभाग चंपावत परिसर में स्थानीय ठेकेदारों की बैठक में नई टेंडर नीति का विरोध करने का निर्णय लिया गया। तय किया गया कि जब तक ठेेकेदारों के हित में निर्णय नहीं लिया जाता तब तक कोई भी ठेकेदार टेंड प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगा और न ही निर्माण कार्य करवाएगा। इस दौरान ठेकेदारों ने नई नीति वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी भी की।
ठेकेदारों ने कहा कि पहले कार्य का अनुभव 25 प्रतिशत मांगा जाता था, जिसे अब 80 प्रतिशत कर दिया गया है। जबकि टर्नओवर 25 प्रतिशत से बढ़कर 200 प्रतिशत किया गया है। सरकार की इस नीति से छोटे ठेकेदारों की आजीविका प्रभावित होगी। कई ठेकेदार को काम से वंचित होना पड़ेगा। वक्ताओं ने बार-बार अधिदेयता प्रमाण पत्र देने की बाध्यता भी कर दी गई है। जिसके लिए हर टेंडर प्रक्रिया के बाद जीएसटी के लिए कार्यालय जाना पड़ता है। इससे ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान उठाने के साथ उनके समय की भी बर्बादी होगी। इस मौके पर सर्वसम्मित से ठेकेदार यूनियन का गठन कर मंदीप ढेक को अध्यक्ष, राजेश गिरी को महामंत्री बनाया गया। यूनियन के अध्यक्ष मंदीप ढेक ने ठेकेदारों के हितों के लिए कार्य करने का आश्वासन दिया। इस मौके पर अनिल बोहरा, प्रकाश चंद्र भट्ट, हरीश चंद्र जोशी, मनीष पांडेय, रितेश तड़ागी, जगदीश पांडेय, नंदा बल्लभ कापड़ी, कुलदीप महराना, दिनेश जोशी, अशोक पुनेठा, बसंत तड़ागी, किशोर खर्कवाल, बलवंत महराना सहित दर्जनों ठेकेदार मौजूद रहे।

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