कुमाऊं
नी भाषा में भागवत कथा सुनने पर श्रद्धालुओं को हो रही है अलौकिक आनंद की अनुभूति।
चंपावत के नाग नाथ मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का वाचन पुराणों के मर्मग्य एवं प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य प्रकाश कृष्ण शास्त्री द्वारा अब कुमाऊनी भाषा में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी बोली, अपनी भाषा, अपने आवेश परिवेश, रीति रिवाज एवं उन्हें सनातन के अंदर छुपे प्रकृति के विराट स्वरूप से अवगत कराना है। कुमाऊनी भाषा में आचार्य श्री द्वारा कथा को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुतीकरण का तरीका श्रद्धालुओं को काफी पसंद आने के साथ उनकी और अधिक रुचि बढ़ती जा रही है। आचार्य श्री का कहना है कि आज बच्चों को शिक्षा से अधिक संस्कारों की जरूरत है। संस्कारों के कारण की सनातन की व्यवस्था हम सबको आदर्श एवं सनातन रीति रिवाज में बांधती है। जहां बच्चे माता-पिता में ईश्वर का रूप देखते हैं, वहीं पीपल के पेड़ में लगातार पानी डालकर हम पर्यावरण का संदेश संदेश देते हैं।अपने से बड़ों का सम्मान करने से उन्हें उनका अंतरमन से जो आशीर्वाद मिलता है वही उनके जीवन को भी आलोकित कर देता है। आचार्य श्री का कहना है कि पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण ने हमारी सामाजिक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर दिया है। समाज में सनातन के मूल्य की स्थापना के लिए हम सबको अपने-अपने स्तर से प्रयास करना होगा।
फोटो : भागवत कथा का वाचन करते हुए श्री आचार्य।

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