आखिर किसान के बेटे ने समझा किसान का दर्द, और 35 किलोमीटर दूर जाकर उसके बैल को दिया नया जीवन।
लोहाघाट। आखिर किसान का बेटा ही किसान के दर्द को समझता है। जब सरयू नदी से लगे नेत्र सलान गांव के राजेंद्र सिंह के बैल की एक आंख, दो बैलों की लड़ाई में बाहर आ गई थी, तो उसकी भविष्य की उम्मीद में ही पानी फिर गया था। जब राजेंद्र लोहाघाट की पशु चिकित्सालय में आकर डॉ जेपी यादव को घटना की जानकारी दी तो उन्होंने कहा यह कार्य दवा से नहीं चलेगा बल्कि वह स्वयं ही नेत्र सलान गांव के लिए निकल गए। यहां से 35 किलोमीटर दूर जाकर देखा तो बैल की एक आंख बाहर निकली हुई थी। डॉ यादव ने मौके में ही अपने साथ ले गए पशुधन प्रसार अधिकारी पुल्ला के सहयोग से मौके में ही बैल को बेहोश कर उसका सफल ऑपरेशन करने के बाद उसकी आंखों को ठीक कर दिया। जिससे राजेंद्र के मुरझाए चेहरे में प्रसन्नता लोट आई। राजेंद्र का कहना था कि किसान का दर्द तो किसान ही समझ सकता है। बैल के घायल होने से तो मेरी किसानी ही चौपट हो जाती। डॉ साहब ने मेरी जो मदद की है उसके लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं है। मालूम हो कि डॉ यादव किसान के ऐसे बेटे हैं जिन्होंने यहां आने के बाद “खटका” रोग के ऐसे दर्जनों पशुओं का ऑपरेशन कर उन्हें राहत दी है। जिसके लिए पशु पालक लंबे समय से परेशान थे,तथा पशुओं के मालिक भी उन्हें छोड़ने का मन बनाए हुए थे। डॉ यादव के हुलिए को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह पशु चिकित्सा होंगे। यह जब काम करने में लगते हैं तो उनके कपड़े गोबर व गोमुत्र से लिपट जाते है। परन्तु इन्हें उसकी कोई परवाह नहीं रहती।
फोटो_ नेत्र सलान गांव में बैल का सफल ऑपरेशन करते डॉ जेपी यादव।

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