237.74 करोड़ का आईएसबीटी बन रहा, खटारा बसों से सफर करने को मजबूर यात्री
टनकपुर डिपो की बस तिलौन के पास खराब, यात्रियों को निजी वाहनों से जाना पड़ा गंतव्य तक
87 बसों में से 38 ओवरमाइलेज, नई बसों के लिए भेजा गया प्रस्ताव
टनकपुर। एक ओर टनकपुर में 237.74 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) का निर्माण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड परिवहन निगम के टनकपुर और लोहाघाट डिपो की पुरानी बसें यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। आए दिन बसों में तकनीकी खराबी आने से यात्रियों को बीच रास्ते में ही परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बेरीनाग से टनकपुर आ रही परिवहन निगम की बस तिलौन के पास अल्टरनेटर खराब होने से रास्ते में बंद हो गई। बस में सवार यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। टनकपुर डिपो के अधिकारियों के अनुसार, खराब हुई बस आठ साल पुरानी है और करीब 10 लाख किलोमीटर चल चुकी है।
87 में से 38 बसें ओवरमाइलेज
टनकपुर डिपो के प्रभारी एजीएम सुरेश पांडे ने बताया कि टनकपुर रोडवेज के बेड़े में कुल 87 बसें हैं। इनमें से 38 बसें ओवरमाइलेज हो चुकी हैं। बेरीनाग जा रही बस में तकनीकी खराबी आने के कारण वह रास्ते में बंद हो गई थी। उन्होंने बताया कि नई बसों की उपलब्धता के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
सुविधाओं पर सवाल
एक ओर करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक आईएसबीटी बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बसों की कमी और पुरानी बसों में तकनीकी खराबी यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा देने के लिए बसों के बेड़े को दुरुस्त करना भी जरूरी है। लोगों ने पुरानी बसों की तकनीकी जांच कराने और डिपो में नई बसें उपलब्ध कराने की मांग की है।

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