October 8, 2026

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गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के मामले में डीएम ने दिए जांच के निर्देश

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गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के मामले में डीएम ने दिए जांच के निर्देश

जांच समिति गठित, चिकित्सकीय अभिलेखों के आधार पर होगी निष्पक्ष जांच

चम्पावत। गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के प्रकरण का जिलाधिकारी मनीष कुमार ने संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच समिति गठित कर उपलब्ध चिकित्सकीय अभिलेखों, जांच रिपोर्ट और अन्य तथ्यों का बारीकी से परीक्षण करने को कहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही मामले में अंतिम निष्कर्ष और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान के अनुसार 22 वर्षीय प्रियंका ने 18 अगस्त को उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट की ओपीडी में चिकित्सकीय परामर्श लिया था। महिला ने बताया था कि करीब दो दिन से उसे गर्भस्थ शिशु की हलचल महसूस नहीं हो रही है।

अभिलेखों के अनुसार 12 अगस्त की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु जीवित पाया गया था। रिपोर्ट में शिशु की हृदय गति 135 प्रति मिनट तथा फीटल और कार्डियक मूवमेंट मौजूद होने का उल्लेख है। उस समय गर्भावस्था की अवधि करीब 34 सप्ताह बताई गई थी।

वहीं, 18 अगस्त की निजी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में शिशु की कार्डियक एक्टिविटी और फीटल मूवमेंट अनुपस्थित पाए गए तथा फीटल डिमाइस का उल्लेख किया गया।

सीएमओ ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध रिपोर्टों से 12 अगस्त को शिशु के जीवित होने और 18 अगस्त को उसकी मृत्यु होने की पुष्टि होती है। हालांकि, केवल इन दो अल्ट्रासाउंड रिपोर्टों के आधार पर मृत्यु का वास्तविक समय और कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित चिकित्सकीय अभिलेखों, मां की स्वास्थ्य स्थिति और अन्य आवश्यक जांचों का विस्तृत परीक्षण जरूरी है।

जिलाधिकारी ने कहा कि मामले में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच समिति को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

सीएमओ ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या चिकित्सकीय संस्थान के संबंध में निष्कर्ष निकालने से बचें। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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