प्रशासन का दावा कि एक किमी दूर पुलिया, फिर क्यों जान जोखिम में डाल रहे बच्चे
बूंगादुर्गापीपल तोक के बच्चों को चार किमी पैदल तय करना पड़ता है रास्ता, बरसात में नदी पार करने का वीडियो प्रसारित होने के बाद उठा सवाल
चंपावत। बूंगादुर्गापीपल तोक से ककनई इंटर कॉलेज जाने वाले बच्चों के नदी के तेज बहाव के बीच से गुजरने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद स्कूल तक पहुंचने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन की ओर से नदी पर पुलिया करीब एक किलोमीटर दूर होने की बात कही जा रही है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को रोज करीब चार किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है। ऐसे में सवाल है कि जब बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचने का रास्ता इतना लंबा और बरसात में जोखिम भरा है तो उन्हें सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
ककनई इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बरसात में स्कूल जाना किसी चुनौती से कम नहीं है। बूंगादुर्गापीपल तोक से विद्यालय तक पहुंचने के दौरान उन्हें नदी पार करनी पड़ती है। शनिवार को स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद घर लौट रहे बच्चों का वीडियो सामने आया, जिसमें वे तेज बहाव के बीच एक-दूसरे का सहारा लेकर नदी पार करते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक बच्चा शरारत करते हुए बहने से भी बचा। वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों के अनुसार सामान्य दिनों में बच्चे करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय पहुंच जाते हैं, लेकिन बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर यही रास्ता खतरनाक हो जाता है। बच्चों के पास स्कूल जाने के लिए सुरक्षित और छोटा वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण उन्हें जोखिम उठाना पड़ता है।
वहीं ग्राम प्रधान जगदीश सिंह का कहना है कि नदी पर पुलिया करीब एक किलोमीटर दूर है। बच्चों को वहां तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। उनका कहना है कि यदि विद्यालय जाने वाले मार्ग पर ही सुरक्षित पुलिया या पैदल पुल का निर्माण हो जाए तो बच्चों को नदी के तेज बहाव से होकर गुजरने की मजबूरी नहीं रहेगी।
चार किमी का सफर, बरसात में बढ़ता खतरा
बूंगादुर्गापीपल तोक के बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचने की दूरी और नदी का उफान दोनों बड़ी चुनौती हैं। बारिश में जलस्तर बढ़ने पर अभिभावकों को बच्चों के स्कूल से सुरक्षित लौटने की चिंता सताती रहती है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें स्कूल भेजना मजबूरी है।
पुलिया एक किमी दूर तो रास्ता सुरक्षित क्यों नहीं?
प्रशासन की ओर से नदी पर करीब एक किलोमीटर दूर पुलिया होने की बात कही जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि यदि मौजूदा पुलिया बच्चों के लिए व्यावहारिक स्कूल मार्ग नहीं है तो उन्हें सुरक्षित तरीके से विद्यालय तक पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। ग्रामीणों की मांग है कि मौके का स्थलीय निरीक्षण कर बच्चों की आवाजाही के लिहाज से सुरक्षित मार्ग तैयार किया जाए।
आजादी के 80 साल बाद भी वही सवाल
देश आजादी के 80वें वर्ष में पहुंच चुका है और दूरस्थ गांवों को सड़क व बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने के दावे किए जा रहे हैं। इसके बावजूद स्कूली बच्चों को बरसात में उफनती नदी पार करनी पड़े तो यह व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल है। बच्चों की किताब-कापियां बैग में हैं, लेकिन स्कूल पहुंचने की राह में सुरक्षा की गारंटी नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थायी समाधान के लिए विद्यालय के रास्ते में सुरक्षित पुलिया या पैदल पुल बनाया जाना जरूरी है।

More Stories
विष्णु गिरी-सतेंद्र रावत और अनिरुद्ध पुनेठा-ऋषभ शाह की जोड़ी बनी विजेता
छतार में बनेगा भव्य घंटाघर, चम्पावत को मिलेगी नई पहचान
राष्ट्रीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में चम्पावत का मान बढ़ाने पर मुख्य फार्मेसी अधिकारी विष्णु गिरी गोस्वामी सम्मानित