August 14, 2026

आम जनता की आवाज

सच का सारथी

Dukan Ad
Dukan Ad
Dukan Ad

चंपावत के वीर सपूत को कब मिलेगा सम्मान? स्वतंत्रता सेनानी लक्ष्मी दत्त सक्टा की स्मृति में स्मारक की पुकार

चंपावत के वीर सपूत को कब मिलेगा सम्मान? स्वतंत्रता सेनानी लक्ष्मी दत्त सक्टा की स्मृति में स्मारक की पुकार

…स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लक्ष्मी दत्त सक्टा को सम्मान का इंतजार, स्मारक की मांग उठी

चंपावत। देश की आज़ादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले ग्राम सभा खरक कार्की निवासी स्वर्गीय लक्ष्मी दत्त सक्टा पुत्र चिंतामणि आज भी सरकारी स्मृतियों में अपेक्षित स्थान से वंचित हैं। स्वतंत्रता के दशकों बाद भी उनके योगदान को वह सम्मान और पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वे वास्तविक रूप से अधिकारी थे। परिजनों और ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश और पीड़ा है कि जिले में उनके नाम पर न तो कोई स्मारक स्थापित है और न ही कोई ऐसा चिन्हित स्थल, जो आने वाली पीढ़ियों को उनके त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की गाथा से परिचित करा सके।

परिजनों के पास उपलब्ध ताम्रपत्र एवं पुराने राजस्व अभिलेख इस बात के सशक्त प्रमाण हैं कि लक्ष्मी दत्त सक्टा ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी। ताम्रपत्र में उनके राष्ट्रहित में किए गए योगदान के लिए सम्मानित किए जाने का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। वहीं पुराने सरकारी दस्तावेजों में भी उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में दर्ज किया गया है तथा उनका निवास ग्राम खर्ककार्की, तहसील चंपावत बताया गया है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उनका निधन 28 जुलाई 1987 को हुआ था।

परिजनों का कहना है कि लक्ष्मी दत्त सक्टा ने अपने संपूर्ण जीवन में विवाह नहीं किया और राष्ट्रसेवा को ही अपना ध्येय माना। उन्होंने सतीश चंद्र सक्टा को अपना विधिक वारिस घोषित किया था। इस संबंध में तहसील अभिलेखों सहित सभी आवश्यक दस्तावेज प्रशासन को सौंपे जा चुके हैं, बावजूद इसके वारिस प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया अब तक लंबित बनी हुई है, जिससे परिजनों में निराशा और असंतोष व्याप्त है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के वारिसों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलने वाली सुविधाओं जमीन आदि भी नहीं दी गई।

यह प्रकरण ग्राम प्रधान कुलदीप कार्की तथा स्वर्गीय लक्ष्मी दत्त सक्टा के वारिस सतीश चंद्र सक्टा द्वारा जिलाधिकारी के समक्ष भी उठाया गया। इसके बाद प्रशासन की ओर से पर्यटन विभाग के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की स्मृति में स्मारक निर्माण की संभावना पर विचार किए जाने की बात कही गई है।

परिजनों और ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों का गंभीरता से परीक्षण कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लक्ष्मी दत्त सक्टा के योगदान को विधिवत मान्यता दी जाए तथा उनके नाम पर भव्य स्मारक स्थापित कर उन्हें वह सम्मान प्रदान किया जाए, जिसके वे सच्चे हकदार हैं।
उनका कहना है कि जब सरकार स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान और उनकी स्मृतियों को संजोने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है, तो चंपावत के इस वीर सपूत को भी राष्ट्र की स्मृति में उचित स्थान मिलना ही चाहिए, ताकि उनका त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सके।
फोटो… पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा दिया गया ताम्र पत्र

शेयर करे