August 4, 2026

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तीन साल बाद भी घिंघारुकोट सड़क का इंतजार, मरीज-बुजुर्ग आज भी डोली के सहारे

तीन साल बाद भी घिंघारुकोट सड़क का इंतजार, मरीज-बुजुर्ग आज भी डोली के सहारे
चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से सुदूर गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की घोषणा के बावजूद पाटी विकासखंड के तोक घिंघारुकोट के ग्रामीण आज भी सड़क का इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 2024 में गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने की घोषणा की गई थी, लेकिन करीब तीन वर्ष बीतने के बाद भी सड़क निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क नहीं पहुंचने से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को आज भी दुर्गम पहाड़ी रास्तों से आवाजाही करनी पड़ती है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को परिजन डोली या कंधों के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार जिलाधिकारी और संबंधित विभाग से गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। बुजुर्गों का कहना है कि वे अपने जीवनकाल में गांव तक सड़क पहुंचते देखना चाहते हैं, ताकि अंतिम यात्रा भी पगडंडी नहीं, बल्कि सड़क मार्ग से हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री की मंशा गांवों को सड़क सुविधा देकर पलायन रोकने और विकास को गति देने की है, लेकिन विभागीय स्तर पर देरी से यह उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि घोषणा धरातल पर कब उतरती है।
लोक निर्माण विभाग का पक्ष
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता हितेश कांडपाल ने बताया कि प्रस्तावित पांच किलोमीटर सड़क में एक किलोमीटर पर डामरीकरण किया जा चुका है। शेष चार किलोमीटर वन भूमि से होकर गुजरता है, जिसके लिए वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि स्वीकृति मिलते ही शेष सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

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