15 साल की उम्र में शादी, 7 साल तक पति ने बनाया बंधक… जनसुनवाई में छलका चंपावत की बेटी का दर्द
चंपावत। उत्तराखंड के चंपावत जिले से बाल विवाह और महिला उत्पीड़न का एक बेहद मार्मिक मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंची एक महिला ने अपनी आपबीती सुनाई तो मौजूद अधिकारी भी भावुक हो गए। पीड़िता ने बताया कि महज 15 वर्ष की उम्र में उसकी शादी राजस्थान के भरतपुर में कर दी गई थी, जिसके बाद पति ने उसे करीब सात वर्षों तक एक कमरे में बंधक बनाकर रखा और लगातार मारपीट करता रहा।
चंपावत के टकना गांव निवासी विमला ने बताया कि विवाह के बाद उसे घर से बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं थी। इतना ही नहीं, पिता के निधन की जानकारी भी उससे छिपाई गई। वर्षों तक मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलने के बाद एक दिन मौका मिलने पर उसने चोरी-छिपे अपनी बहन को फोन कर पूरी आपबीती बताई। इसके बाद परिजनों की मदद से वह किसी तरह पति के चंगुल से निकलकर अपने मायके चंपावत लौट सकी।
सोमवार को विमला अपने दो बच्चों के साथ जनसुनवाई में पहुंची। उसने प्रशासन से बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था, पहचान संबंधी दस्तावेज बनवाने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की। पीड़िता ने साफ कहा कि वह अब किसी भी परिस्थिति में अपने ससुराल वापस नहीं जाएगी और बच्चों के साथ चंपावत में ही नया जीवन शुरू करना चाहती है।
पीड़िता ने बताया कि नाबालिग अवस्था में उसकी शादी करा दी गई थी। कम उम्र में विवाह के कारण उसकी पढ़ाई छूट गई और बचपन हिंसा व प्रताड़ना के बीच बीत गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बाल विवाह ने छीना बचपन
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि बाल विवाह केवल सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बच्चियों के शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार पर सीधा हमला है। समय रहते हस्तक्षेप न होने पर ऐसे मामले वर्षों तक पीड़िताओं को हिंसा और शोषण झेलने के लिए मजबूर कर देते हैं।
कानून क्या कहता है?
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की का विवाह कराना अपराध है। बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग करने या उसे बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं महिला को बंधक बनाना, मारपीट और घरेलू हिंसा भी भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध हैं।
प्रशासन ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
जिला प्रशासन ने पीड़िता के दोनों बच्चों का स्कूल में प्रवेश, आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने, परित्यक्ता पेंशन और पात्रता के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया है।
जिलाधिकारी बोले
“पीड़िता के बच्चों के स्कूल में प्रवेश देनेवके निर्देश दे दिए गए हैं। राजस्थान का आधार कार्ड आवश्यकतानुसार संशोधित कराया जाएगा। भूमि उपलब्ध होने पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाएगा। साथ ही परित्यक्ता पेंशन भी उपलब्ध कराई जाएगी।”
— मनीष कुमार, जिलाधिकारी,

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