September 8, 2026

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लोहाघाट उप जिला अस्पताल बना सियासत का अखाड़ा, डॉक्टरों की तैनाती स्थानांतरण रोकने श्रेय लेने को लेकर बयान बाजी

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लोहाघाट उप जिला अस्पताल बना सियासत का केंद्र, डॉक्टरों की तैनाती स्थानांतरण  रुकवाने का श्रेय को लेकर तेज हुई बयानबाजी

लोहाघाट। विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आते ही लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच श्रेय लेने की होड़ दिखाई दे रही है।    यह जनप्रतिनिधि इससे पहले कभी लोहाघाट अस्पताल की समस्या को लेकर कभी आगे नजर नहीं आए ना कभी धरने में बैठे। चुनाव आते ही उन्होंने अस्पताल को सियासत का अखाड़ा बना दिया है।

कांग्रेस विधायक खुशाल सिंह अधिकारी का कहना है कि उप जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की तैनाती उनके लगातार प्रयासों का परिणाम है, जबकि भाजपा नेता इसका श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं। दूसरी ओर, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी ने अपने सोशल मीडिया माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल से मुलाकात कर उप जिला चिकित्सालय में आठ चिकित्सकों की तैनाती/स्थानांतरण के संबंध में चर्चा की, जिस पर सकारात्मक आश्वासन मिला है।

इधर, पूर्व विधायक पूरन फर्त्याल भी अस्पताल की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। कुछ माह पूर्व उनके प्रयासों से अस्पताल को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी उपलब्ध कराए गए थे।

वहीं, लोहाघाट विकास संघर्ष समिति भी लंबे समय से अस्पताल की समस्याओं और संसाधनों की कमी को लेकर लगातार आवाज उठाती रही है।

सूत्रों के अनुसार, लगातार हो रही राजनीतिक बयानबाजी का असर अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है। उनका कहना है कि वे सीमित संसाधनों के बीच स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन मरीजों की ओपीडी जिला अस्पताल के लगभग बराबर रहती है, लेकिन अस्पताल का वार्षिक बजट करीब 16 लाख रुपये ही है, जबकि जिला अस्पताल का बजट एक करोड़ 16 लाख रुपये से अधिक बताया जाता है।

उप जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. विराज राठी का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों के भीतर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता के बीच स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि श्रेय की राजनीति से आगे बढ़कर अस्पताल की आधारभूत समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए।

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