जनसुझावों के आधार पर तैयार होगा मास्टर प्लान-2041, नजूल भूमि पर डीएम ने स्थिति की स्पष्ट
चंपावत । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की “आदर्श चंपावत–विकसित चंपावत” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में जिला प्रशासन ने मास्टर प्लान-2041 के प्रारूप और नजूल भूमि को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट की है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि मास्टर प्लान का उद्देश्य जनपद का सुनियोजित एवं संतुलित विकास सुनिश्चित करना है, जबकि नजूल भूमि का विषय इससे पूरी तरह अलग है।
जिलाधिकारी ने बताया कि नजूल भूमि राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि की विशेष श्रेणी है, जिसका नियमन भू-राजस्व नियमों एवं राज्य सरकार की नीतियों के अनुसार किया जाता है। नजूल भूमि से जुड़े मामले वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं और प्रशासन न्यायालय के निर्देशों तथा शासन की नीतियों के अनुरूप ही कार्रवाई करेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मास्टर प्लान-2041 से किसी भी नागरिक के पहले से स्थापित भूमि अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। जिनके अधिकार विधिवत परिपक्व हैं, वे नियमानुसार अपनी गतिविधियां पूर्ववत संचालित कर सकेंगे।
जिलाधिकारी ने बताया कि महायोजना के तहत भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क, पार्क, पार्किंग, जलनिकासी, सार्वजनिक सुविधाओं, थानों एवं विद्युत ढांचे के लिए स्थान चिन्हित किए गए हैं। साथ ही नागरिकों की सुविधा के लिए 300 से 400 मानक भवन नक्शे भी संदर्भ हेतु उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह महायोजना पूरी तरह जनभागीदारी पर आधारित है। प्रारूप को तहसील, ब्लॉक और नगर पालिका कार्यालयों में आम जनता के अवलोकन के लिए रखा गया है। विशेषज्ञों की टीम गांव-गांव जाकर भी लोगों से सुझाव ले रही है।
जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि वे 31 जुलाई तक अपने सुझाव एवं आपत्तियां लिखित रूप में उपलब्ध कराएं। प्राप्त सुझावों को शामिल करने के बाद ही मास्टर प्लान-2041 को अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।

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