स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जन्मस्थली के सम्मान की लड़ाई सातवें दिन भी जारी, 102 वर्षीय बुजुर्ग माता भी धरने पर बैठीं
स्मृति स्थल निर्माण के लिए स्वीकृत धनराशि बहाल करने की मांग, आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन पर जनभावनाओं की अनदेखी का आरोप लगाया
चम्पावत। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जन्मस्थली के सम्मान की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन गुरुवार को सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन के उदासीन रवैये के चलते 102 वर्षीय पूजनीय माता भागीरथी देवी तथा 94 वर्षीय पूर्व प्रधानाचार्य चिरंजी लाल वर्मा को भी धरना स्थल पर बैठना पड़ा। उनका कहना है कि यह केवल दो वरिष्ठ नागरिकों की उपस्थिति नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पीड़ा और जनभावनाओं का प्रतीक है।
धरने में पुष्पा देवी, राधिका देवी, जानकी देवी, सुनीता देवी, जया ओली सहित बड़ी संख्या में महिलाओं और क्षेत्रवासियों ने भाग लेकर आंदोलन को समर्थन दिया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के विरोध में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जन्मस्थली के सम्मान, क्षेत्र की अस्मिता और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से चलाया जा रहा है।
धरना स्थल से वक्ताओं ने कहा कि जब 102 वर्ष की बुजुर्ग माता और 94 वर्षीय शिक्षाविद् को भी न्याय की मांग के लिए धरने पर बैठना पड़े, तो यह शासन-प्रशासन के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग और बलिदान के प्रति यही सम्मान है?
आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन से मांग की कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जन्मस्थली पर स्मृति स्थल निर्माण के लिए स्वीकृत धनराशि को उसके मूल उद्देश्य के लिए तत्काल बहाल किया जाए तथा आंदोलन का सम्मानजनक समाधान निकाला जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जनभावनाओं की लगातार उपेक्षा की गई तो लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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