June 20, 2026

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कुमाऊं स्तरीय द्वितीय वार्षिक संगीत प्रतियोगिता, 100 से अधिक प्रतिभागी ले रहे हिस्सा

द्वितीय कुमाऊं स्तरीय वार्षिक संगीत प्रतियोगिता, 100 से अधिक प्रतिभागी ले रहे हिस्सा

22 जून तक चलेगी प्रतियोगिता, सुगम संगीत, शास्त्रीय गायन और शास्त्रीय वादन में होगा मुकाबला

चंपावत ।

चंपावत के जीजीआईसी ऑडिटोरियम में शुक्रवार से तीन दिवसीय द्वितीय कुमाऊं स्तरीय वार्षिक संगीत प्रतियोगिता का शुभारंभ हो गया। कलश संगीत समिति के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता में कुमाऊं क्षेत्र के 100 से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रतियोगिता 22 जून तक चलेगी।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा की अध्यक्षता में आयोजित पहले सत्र का उद्घाटन नगर पालिका अध्यक्ष प्रेमा पांडेय और लडवाल फाउंडेशन के चेयरमैन नरेंद्र सिंह लडवाल ने किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि संगीत संस्कृति संरक्षण का सशक्त माध्यम है और संस्कृति के संरक्षण से राष्ट्र निर्माण की राह और अधिक मजबूत होती है।

कार्यक्रम की शुरुआत एंजिल एकेडमी चंपावत के छात्र-छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से हुई। पहले दिन शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

दूसरे सत्र में मानेश्वर धाम के महंत धर्मराज पुरी महाराज मुख्य अतिथि रहे। विशिष्ट अतिथियों में भूपेंद्र महर, कलश संगीत समिति के अध्यक्ष हिमेश कलखुड़िया, सचिव गिरीश पंत, उपाध्यक्ष प्रेम बल्लभ पंत, दिनेश बिष्ट और महेश जोशी शामिल रहे।

आयोजकों ने बताया कि प्रतियोगिता प्राथमिक, जूनियर और सीनियर तीन वर्गों में आयोजित की जा रही है। प्रतिभागी सुगम संगीत, शास्त्रीय संगीत और शास्त्रीय वादन की विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

कार्यक्रम में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. बीसी जोशी, रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन राजेंद्र गहतोड़ी, सेवानिवृत्त एबीएसए लोकमणि पंत, जनार्दन चिल्कोटी, प्रेमा चिल्कोटी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विजय वर्मा, प्रकाश पांडेय, राजू पंत, नवीन कोठारी और डॉ. संतोष पांडेय समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

पहले दिन आयोजित प्रतियोगिताएं

प्राथमिक वर्ग: शास्त्रीय गायन (खयाल, ध्रुपद आदि)

जूनियर वर्ग: उपशास्त्रीय गायन (ठुमरी, दादरा, टप्पा आदि)

सीनियर वर्ग: शास्त्रीय गायन (खयाल, ध्रुपद आदि)

सीनियर वर्ग: उपशास्त्रीय गायन (ठुमरी, दादरा, टप्पा आदि)

जूनियर वर्ग: शास्त्रीय वादन (तबला, पखावज आदि)

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