June 19, 2026

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चम्पावत में रिवर्स पलायन की नई तस्वीर: दिल्ली की नौकरी छोड़ गांव लौटे दंपति, खेती-डेयरी और होमस्टे से सालाना कमा रहे 20 लाख

चम्पावत में रिवर्स पलायन की नई तस्वीर: दिल्ली की नौकरी छोड़ गांव लौटे दंपति, खेती-डेयरी और होमस्टे से सालाना 20 लाख की आय
चम्पावत । पहाड़ों से रोजगार की तलाश में महानगरों की ओर होने वाले पलायन के बीच सीमांत जनपद चम्पावत से रिवर्स पलायन की एक प्रेरक कहानी सामने आई है। लोहाघाट क्षेत्र के राकेश उपाध्याय और उनकी पत्नी हेमा उपाध्याय ने दिल्ली की नौकरी छोड़ अपने पैतृक गांव में जैविक खेती, डेयरी, मत्स्य पालन और ग्रामीण पर्यटन को अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मॉडल जनपद चम्पावत के विजन और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती सुविधाओं से प्रेरित होकर दंपति ने गांव लौटकर आधुनिक कृषि आधारित उद्यम शुरू किया। वर्तमान में वे खेती, पशुपालन और होमस्टे के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 18 से 20 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।
दंपति के फार्म में दो दर्जन से अधिक दुधारू पशु हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब डेढ़ क्विंटल दूध का उत्पादन हो रहा है। गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद एवं प्राकृतिक कीटनाशक तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा काली हल्दी, औषधीय पौधों, फल, फूल और सब्जियों का उत्पादन भी किया जा रहा है।
राकेश और हेमा ने अपने फार्म परिसर में एक होमस्टे भी विकसित किया है, जहां पर्यटकों को पहाड़ी जैविक उत्पादों से बने पारंपरिक व्यंजनों के साथ योग, प्राणायाम और ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों का अनुभव कराया जाता है। हिमालय का मनमोहक दृश्य भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
उच्च शिक्षित हेमा उपाध्याय का कहना है कि गांव लौटने के बाद जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रकृति के बीच रहकर काम करने से स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और जीवन में संतोष तथा आत्मविश्वास बढ़ा है।
दंपति अपनी सफलता का श्रेय कृषि विज्ञान केंद्र, उद्यान विभाग और पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर दिए गए प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन को देते हैं। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक खेती ने उनके उद्यम को नई दिशा दी है।
प्रशासन की त्वरित पहल से बढ़ा भरोसा
फार्म तक पहुंचने वाली लगभग 100 मीटर सड़क लंबे समय से जर्जर स्थिति में थी, जिससे कृषि उत्पादों के परिवहन और पर्यटकों के आवागमन में परेशानी हो रही थी।
मामल जिलाधिकारी मनीष कुमार के संज्ञान में आने पर प्रशासन ने तत्काल संबंधित विभागों को निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की संवेदनशील और त्वरित कार्यशैली से विकास कार्यों को गति मिली है।
राकेश और हेमा उपाध्याय की यह सफलता कहानी साबित करती है कि इच्छाशक्ति, नवाचार और प्रशासनिक सहयोग के बल पर पहाड़ की माटी में भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यह मॉडल आत्मनिर्भर उत्तराखंड, रिवर्स पलायन और ग्रामीण विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।

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