चम्पावत। मुड़ियानी निवासी 16 वर्षीय हिमांशु रावत इन दिनों बोन टीबी (अस्थि क्षय रोग) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। लंबे समय तक बीमारी का पता न चलने और इलाज में सारी जमा-पूंजी खर्च हो जाने के बाद अब परिवार ने प्रशासन और समाजसेवियों से मदद की अपील की है।
मूल रूप से सल्ली-सायली क्षेत्र और वर्तमान में मुड़ियानी निवासी हिमांशु करीब दो वर्ष पहले इस बीमारी की चपेट में आया था। शुरुआत में उसके पैरों में कमजोरी आने लगी और धीरे-धीरे चलना-फिरना लगभग बंद हो गया। परिवार ने हल्द्वानी और देहरादून समेत कई अस्पतालों में जांच कराई, लेकिन बीमारी की सही पहचान नहीं हो सकी। आखिरकार दो वर्ष बाद पीलीभीत में जांच के दौरान पता चला कि वह हड्डी में होने वाली टीबी (बोन टीबी/अस्थि क्षय रोग) से पीड़ित है।
हिमांशु ने सल्ली के सरकारी विद्यालय से हाईस्कूल (दसवीं) तक की पढ़ाई पूरी की थी, लेकिन बीमारी के कारण उसकी आगे की पढ़ाई प्रभावित हो गई। इंटर कॉलेज घर से दूर होने के कारण वह पैदल आने-जाने में असमर्थ है। हिमांशु का कहना है कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहता है, लेकिन अभी वह सामान्य रूप से चल भी नहीं पा रहा है और अस्पताल जाने के लिए भी उसे अपनी मां का सहारा लेना पड़ता है।
हिमांशु के पिता जगत सिंह रावत दिल्ली में प्राइवेट नौकरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उसकी मां ममता देवी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में इलाज पर परिवार की पूरी जमा-पूंजी खर्च हो चुकी है। वर्तमान में भी करीब छह महीने से अधिक का इलाज शेष है और अधिकांश दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
उन्होंने बताया कि छह माह पूर्व गोरलचौड़ मैदान में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में हिमांशु से संबंधित दस्तावेज भी जमा कराए गए थे, लेकिन अब तक किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल पाई है। परिवार का कहना है कि जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समाज के सक्षम लोगों से सहयोग मिलने पर हिमांशु का इलाज और उसकी पढ़ाई दोनों जारी रखी जा सकती हैं।
परिवार ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से आर्थिक सहायता तथा आवश्यक चिकित्सीय सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि हिमांशु फिर से सामान्य जीवन की ओर लौट सके।

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