शिक्षा विभाग के जालसाज बाबू की याचिका खारिज 7 लाख की धोखाधड़ी का आरोप
संवाददाता चंपावत। GIC चौमेल के तत्कालीन कनिष्ठ सहायक मनीष कलौनी ने चेक में जालसाजी कर 7 लाख रुपये से अधिक की गड़बड़ी की थी
सितंबर 2015 के इस मामले में दिसंबर 2025 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सजा सुनाई थी
चंपावत। चेक में जालसाजी कर 7 लाख रुपये की धोखाधड़ी के दोषी जीआईसी चौमेल के तत्कालीन कनिष्ठ सहायक मनीष कलौनी की अपील सत्र न्यायाधीश के न्यायालय ने खारिज कर दी है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अभियुक्त मनीष कलौनी को 16 दिसंबर 2025 को सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ यह अपील दायर की गई थी। सत्र न्यायाधीश जिला जज अनुज कुमार संगल ने पूरे मामले के परीक्षण के बाद आज 21 मई को अपील निरस्त करने का आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले जिला शासकीय अधिवक्ता विद्यादत्त जोशी ने बताया कि सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अपील निरस्त करने के अलावा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय द्वारा पारित दोषसिद्धि एवं दंडादेश की पुष्टि की है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अभियुक्त मनीष कलौनी को 16 दिसंबर 2025 को IPC की धारा 409 के अंतर्गत 7 वर्ष का कठोर कारावास, 1 लाख रुपये का अर्थदंड व अर्थदंड नहीं चुकाने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास, 467 के अंतर्गत 5 वर्ष का कठोर कारावास, 50 हजार रुपये का अर्थदंड व अर्थदंड नहीं चुकाने पर 10 माह का अतिरिक्त कारावास व 468 के अंतर्गत 7 वर्ष का कठोर कारावास, 50 हजार रुपये का अर्थदंड व अर्थदंड नहीं चुकाने पर 10 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने की सजा सुनाई थी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

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