सीएम की अधूरी घोषणा पर भड़के ग्रामीण, बोले — अब आंदोलन ही आख़िरी रास्ता
डीएम के ज़रिए मुख्यमंत्री को सौंपेंगे ज्ञापन, सड़क निर्माण नहीं हुआ तो करेंगे उग्र प्रदर्शन लोहाघाट (संवाददाता):
राज्य सरकार एक ओर पहाड़ी क्षेत्रों को सड़कों से जोड़ने और पलायन रोकने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर पाटी ब्लॉक के सुदूरवर्ती गांव पटनगांव, गीजू-बसान, बांस-बस्वाड़ी, जमनटाक, डौड और घिंघारूकोट जैसे कई गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने से न केवल आवाजाही में दिक्कतें हो रही हैं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हैं।गांवों की छात्राएं रोजाना पांच किलोमीटर पैदल जंगल पार कर स्कूल पहुंचती हैं। जंगली जानवरों का डर हमेशा बना रहता है। बुजुर्ग और बीमारों को आज भी डोली में अस्पताल तक पहुंचाना ग्रामीणों की मजबूरी बन चुका है।ग्रामीणों ने बताया कि मुख्यमंत्री की वर्ष 2024 की घोषणा (संख्या 147/2024) और 2021–22 में मिली प्रारंभिक वित्तीय स्वीकृति के बावजूद अब तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ। फाइलें विभाग के दफ्तरों में इधर-उधर घूम रही हैं।”कागजी कार्यवाही से नहीं, धरातल पर दिखे विकास”
सामाजिक कार्यकर्ता चंद्र मोहन पाण्डेय ने कहा कि सरकार और प्रशासन वर्षों से केवल कागजी कार्यवाही में व्यस्त हैं। “हम लोग रोज़ाना बीमार महिलाओं और बुजुर्गों को डोली में ढोते हैं, लेकिन अब यह सहन नहीं होगा,” उन्होंने कहा।ग्रामीण बुजुर्ग रतन सिंह ने कहा, “हमें भाषणों से नहीं, सड़क निर्माण से मतलब है। दो साल से केवल वादे सुन रहे हैं।”निराश ग्रामीणों ने अब 29 दिसंबर को जिलाधिकारी मनीष कुमार से मुलाक़ात करने का निर्णय लिया है। डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।साथ ही ग्रामीण जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भेजकर आंदोलन में समर्थन की मांग भी करेंगे।
घोषणाओं से नहीं, धरातल पर चाहिए विकास
करीब दो वर्ष हो चुके हैं, पर न घोषणा पूरी हुई, न कार्यवाही। केवल कागजों में विकास दिखाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। सच्चा विकास तब होगा जब सड़कें गांव तक पहुंचेंगी। — नंदू पाण्डेय, ग्रामीण
फ़ाइल फोटो: इलाज के लिए डोली में ले जाते ग्रामीण।

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