हिमवत्स: गाँव की मिट्टी से विज्ञान के शिखर तक पहुँचे डॉ. एच.डी. बिष्ट
चम्पावत : पहाड़ की तपोभूमि चम्पावत जनपद के समीपवर्ती ग्राम डड़ा के सुपुत्र डॉ. हरि दत्त बिष्ट (एच.डी. बिष्ट) न केवल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.) कानपुर के भौतिकी विभागाध्यक्ष रहे, बल्कि उन्होंने शिक्षा और समाज सेवा को जीवन का ध्येय बना लिया। 90 वर्ष की आयु तक कर्मशील रहे इस विद्वान ने 13 दिसंबर 2025 को देह त्याग किया।
बचपन की कठिनाइयों से गढ़ी सफलता
पाँच भाइयों में सबसे बड़े डॉ. बिष्ट ने बाल्यकाल में आर्थिक तंगी और पहाड़ की दुर्गम परिस्थितियों का सामना किया। पिता स्वर्गीय अम्बादत्त बिष्ट की इच्छा थी कि बेटा खूब पढ़े-लिखे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कठिन परिश्रम व लगन से शिक्षा के उच्च शिखर छुए। नैनीताल में प्रारंभिक से लेकर अमेरिका तक की शिक्षा यात्रा उन्होंने छात्रवृत्तियों और सहयोग से पूरी की। डॉ. डी.डी. पंत के निर्देशन में पीएचडी पूरी करने के बाद वे आई.आई.टी. कानपुर में अध्यापक बने।
परिवार को दी शिक्षा की दिशा डॉ. बिष्ट ने स्वयं शिक्षा के नए आयाम स्थापित किए ही, साथ ही अपने चारों भाइयों को भी उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया। उनके छोटे भाई डॉ. प्रेम बल्लभ बिष्ट वर्तमान में आई.आई.टी. चेन्नई में भौतिकी विभाग में कार्यरत हैं। यह परिवार इस बात का उदाहरण बन गया कि यदि संकल्प मजबूत हो तो संसाधनों की कमी सफलता की राह नहीं रोक सकती।जब विज्ञान से जुड़ी समाज सेवाशिक्षा जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. एच.डी. बिष्ट ने डॉ. डी.पी. खंडेलवाल के साथ मिलकर इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स (IAPT) की स्थापना की।
यह संस्था आज भी देश के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चेतना जगाने और शिक्षकों को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है।
‘हिमवत्स समिति’ से गाँव को दी नई पहचान
सेवानिवृत्ति के उपरांत डॉ. बिष्ट ने अपने पैतृक गाँव और बचपन की स्मृतियों को फिर जीवंत किया। अपने छोटे भाई त्रिभुवन बिष्ट (अमेरिका निवासी) के सुझाव पर उन्होंने ‘हिमवत्स समिति’ — हिमालयन वाटर सर्विस एंड डेवलपमेंट एंड एनवायर्नमेंट प्रोटेक्शन कमेटी — की स्थापना की।
समिति ने पहले जल स्रोत संरक्षण और शुद्ध पेयजल उपलब्धता से कार्य प्रारंभ किया, फिर शिक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य को अपने मिशन में जोड़ा।गाँव के प्राथमिक विद्यालय कुलेठी सहित कई विद्यालयों को समिति ने गोद लिया। कंप्यूटर, विज्ञान प्रयोगशाला और पुस्तकालय जैसी सुविधाएँ शुरू की गईं। बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि और अनुशासन में उल्लेखनीय बदलाव आया।
मेधावी छात्रों को छात्रवृत्तियाँ
समिति द्वारा 16 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम में चम्पावत जनपद के 22 विद्यालयों के 67 मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इस अवसर पर समिति की साविद्या स्मारिका का विमोचन भी हुआ।
कार्यक्रम में सहभागिता करने पहुँचे साहित्यकार एवं पूर्व सीएओ भगवत प्रसाद पाण्डेय ने अपने अनुभव साझा किए और हिमवत्स पुस्तकालय हेतु अपनी पुस्तकें भेंट कीं।शिक्षा-जगत के लिए बना प्रेरणा-स्रोतडॉ. एच.डी. बिष्ट भले ही अब इस संसार में नहीं हैं, पर उनका जीवन, कर्म और दृष्टिकोण शिक्षा व समाज सेवा के क्षेत्र में सदैव प्रेरणा देता रहेगा। गाँव की मिट्टी से लेकर विज्ञान के वैश्विक मंच तक उनकी यात्रा पहाड़ के हर युवा के लिए एक उदाहरण है।
भगवत प्रसाद पाण्डेय
(लेखक साहित्यकार और राजस्व विभाग के पूर्व सीएओ)

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