April 23, 2026

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हर-हर मोदी, घर-घर मोदी’ अब ‘हर-हर गुलदार, घर-घर गुलदार’

हर-हर गुलदार, घर-घर गुलदार चंपावत जिले में गुलदारों का आतंक बढ़ता जा रहा है।
चंपावत।
एक माह में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि वन विभाग के प्रयासों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत बनी हुई है। व्यंग्यात्मक नजरिए से देखें तो पुराना चुनावी नारा ‘हर-हर मोदी, घर-घर मोदी’ अब ‘हर-हर गुलदार, घर-घर गुलदार’ बन गया है।
विकास की नई परिभाषा सरकार चंपावत को आदर्श जिला बनाने का दावा कर रही है, लेकिन यहां विकास का मतलब बदल गया है। स्कूलों में शिक्षक, अस्पतालों में डॉक्टर, सड़कों पर गाड़ियां और नेटवर्क टावरों की कमी है। सांझ ढलते ही गुलदार गांव-गांव पहुंच जाते हैं, क्योंकि भोजन की तलाश में इंसान ही निशाना बन रहे हैं। सुबह की पहली खबर अब गुलदार के दर्शन की होती है।मंगोली और च्यूरानी में दो मौतें हो चुकी हैं, कई लोग घायल हुए हैं। ग्रामीण डरे-सहमें जी रहे हैं, लेकिन प्रशासन का आश्वासन वही पुराना है- स्थिति नियंत्रण में है।
वन विभाग एक गुलदार पकड़ता है तो दूसरा आकर भरोसा दिला देता है।
गुलदारों का पक्षगुलदारों की तो सुनिए वे कहते हैं- पहले जंगल में सब था, अब जमीन सिकुड़ गई, भोजन न मिले तो गांव की ओर भागना पड़ता है। फोटो खिंचवाओ, रील बनो, वायरल हो जाओ और खूंखार बन जाओ। भूख लगती है तो क्या करें? पिंजरों की कमी पड़ जाएगी।स्थिति गंभीर है, वन्यजीवों और इंसानों के बीच संतुलन जरूरी। लेखक भगवत प्रसाद पाण्डेय ने व्यंग्य से जागरूकता जगाई है।

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