July 26, 2026

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संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने ग्रोथ सेंटर माँ बाराही धाम का किया भ्रमण

 

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार का चंपावत दौरा : प्राचीन संस्कृति के संरक्षण और ग्रोथ सेंटर को मिला प्रोत्साहन

चंपावत ।

उत्तराखंड सरकार के संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के सचिव श्री दीपक कुमार ने शुक्रवार को अपने एक दिवसीय आधिकारिक प्रवास के दौरान चंपावत जनपद का भ्रमण किया। उनका यह दौरा मुख्य रूप से संस्कृत भाषा के संवर्धन, स्थानीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त दिशा देने पर केंद्रित रहा।

लोहाघाट पहुँचने पर तहसीलदार  जगदीश सिंह नेगी ने उत्तराखंड सरकार के संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के सचिव  दीपक कुमार का स्वागत किया। कुमार ने अद्वैत आश्रम मायावती, कोली ढेक झील, ग्रोथ सेंटर लोहाघाट तथा माँ बाराही धाम, देवीधूरा  भ्रमण किया।

अद्वैत आश्रम मायावती में उन्होंने स्वामी विवेकानंद से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर को देखा और वहाँ की आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया। उन्होंने कहा कि यह आश्रम आस्था और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का महत्वपूर्ण केंद्र है। कोलीढेक झील निरीक्षण के दौरान उन्होंने इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए इसे चंपावत की अमूल्य धरोहर बताया तथा पर्यावरण संरक्षण व पर्यटन विकास की योजनाओं को गति देने पर बल दिया।

लोहाघाट स्थित ग्रोथ सेंटर में सचिव ने स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित लोहे के बर्तनों और हस्तशिल्प उत्पादों की गुणवत्ता का अवलोकन किया। उन्होंने संचालक श्री अमित कुमार और कारीगरों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि – “ग्रोथ सेंटर न केवल ग्रामीणों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा कर रहे हैं, बल्कि पारंपरिक शिल्प और संस्कृति को भी नई पहचान दिला रहे हैं।

इसके बाद सचिव श्री कुमार ने माँ बाराही धाम, देवीधूरा का भ्रमण किया। यहाँ उन्होंने मंदिर की धार्मिक महत्ता, पारंपरिक बग्वाल आयोजन और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण से जुड़े प्रयासों की जानकारी ली। साथ ही संस्कृत विद्यालय का निरीक्षण कर छात्रों से संवाद किया। उन्होंने उनकी शैक्षिक आवश्यकताओं एवं चुनौतियों को समझा और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को और सशक्त बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि – “चंपावत जिले की सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक वातावरण इसे संस्कृत शिक्षा के लिए आदर्श भूमि बनाते हैं। संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान है, जिसे संरक्षित और सशक्त करना हम सबकी जिम्मेदारी है।”

निरीक्षण के दौरान सचिव ने लोहाघाट और देवीधूरा की प्राकृतिक सुंदरता तथा आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि यह क्षेत्र शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन—तीनों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

इस अवसर पर मुख्य शिक्षा अधिकारी श्री मेहरबान सिंह बिष्ट सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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