June 12, 2026

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रमक के खेरकुड़ा गांव में 10 किमी डोली से लाने बाद भी नहीं बचपाई बुजुर्ग की जान, सड़क सुविधा से वंचित है गांव


पाटी विकासखंड के सीमांत क्षेत्र खेरकुड़ा गांव का मामला उबड़खाबड़ पैदल रास्ते को पार करने में लग गए चार

चंपावत/पाटी। पाटी विकासखंड के सीमांत क्षेत्र खेरकुड़ा गांव
में सड़क नहीं होना कई बार जानलेवा हो रहा है। सड़क न होने की कीमत वक्त पर अस्पताल नहीं पहुंचने से एक बुजुर्ग की मौत के रूप में चुकानी पड़ी। करीब 10 किलोमीटर डोली से लाने के बाद रमक से निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जाते वक्त बुजुर्ग की मौत हो गई।

रमक क्षेत्र के खेरकुड़ा तोक तक सड़क सुविधा के कमी से मंगलवार को रमक ग्राम पंचायत के प्रशासक मंगल जोशी के पिता त्रिलोक चंद्र जोशी (67) की अचानक तबीयत बिगड़ी। उन्हें खेरकुड़ा तोक से करीब 10 किलोमीटर दूर रमक तक डोली से लाया गया। इस उबड़खाबड़ रास्ते को पार करते हुए लीलंबर अटवाल, भुवन चंद्र, प्रकाश चंद्र, उमेश चंद्र, नरेश चंद्र, परमानंद, गिरीश जोशी, मंगल जोशी, पानदेव जोशी, दयानंद जोशी, नवीन जोशी आदि की मदद से 4 घंटे से अधिक समय में रमक तक पहुंचाया जा सका। समय बीतने के साथ बीमार बुजुर्ग की हालत बिगड़ने लगी। रमक से निजी वाहन से अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में दम तोड़ दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव तक सड़क होती, तो समय रहते मरीज को अस्पताल पहुंचा पाते और हो सकता था कि समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच जाती। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सड़क की मांग को लेकर आला अफसरों से गुहार लगा थक चुके हैं। लेकिन न रोड बन सकी और न रोड का काम शुरू हो सका। इसका असर गर्भवती महिलाओं, मरीजों, से लेकर बुजुर्गों और आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ग्र मुताबिक सुविधाओं की कमी से लगातार हो रहे पलायन में मरीज़ों को डोली से के सड़क तक पहुंचाने के लिए भी लोग नहीं मिल पा रहे हैं।

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