भालू-तेंदुओं के लिए बनेंगे राहत केंद्र, वन्यजीवों से सुरक्षा को लेकर वन विभाग अलर्ट
प्रमुख वन संरक्षक ने कहा — मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव विभाग की शीर्ष प्राथमिकता
चंपावत।
प्रमुख वन संरक्षक (HOFF) उत्तराखंड रंजन कुमार मिश्र की अध्यक्षता में रविवार को वन विभाग चंपावत की ओर से ‘प्रभाग दिवस’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वन संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम पर विशेष बल दिया गया।
वन विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों और वन सरपंचों से सीधे संवाद करते हुए उन्हें वन संपदा की सुरक्षा एवं संरक्षण के महत्व से अवगत कराया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने कहा कि हाल के दिनों में गुलदार और भालू के हमलों में वृद्धि हुई है, इसे देखते हुए वन विभाग पूरी तरह अलर्ट है। उन्होंने बताया कि वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है।
साथ ही ग्रामीणों और सरपंचों से अपील की गई है कि वे जैविक कूड़ा आबादी वाले क्षेत्रों में न फेंकें, क्योंकि इससे भालू और अन्य वन्यजीव आकर्षित होते हैं।मिश्र ने कहा कि राज्य सरकार ने वन्यजीव हमलों के मामलों में मुआवजा राशि बढ़ा दी है, ताकि पीड़ित परिवारों को शीघ्र राहत मिल सके।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक भालू के हमलों में 23 लोगों की मौत हुई है, जबकि 101 लोग घायल हुए हैं। भालुओं के कारण फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए भी योजना तैयार की जा रही है।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भालू और तेंदुओं के लिए राहत केंद्र बनाए जाएंगे, जहां पकड़े गए वन्यजीवों को रखा जाएगा।
दावाग्नि और भू-कटाव से बचाव के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। बरसात में फलदार पौधों के रोपण का लक्ष्य 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दिया गया है। विभाग सालभर दावाग्नि से बचाव की तैयारी करता है, जिसमें जनसहयोग आवश्यक है।प्रमुख वन संरक्षक ने कहा कि भूमिगत जल बचाने के लिए पौधारोपण, जैविक कचरे के प्रबंधन और पिरूल से आजीविका बढ़ाने की दिशा में कार्ययोजना तैयार की गई है।
उन्होंने बताया कि चंपावत के भिंगराड़ा क्षेत्र में पिरूल के आर्थिक उपयोग को रोजगार से जोड़ने पर कार्य चल रहा है। शीघ्र ही प्रदेशभर में वन पंचायत सरपंचों के दो बड़े सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि चंपावत में फिलहाल डीएफओ स्तर के अधिकारी की कमी है, जिसे जल्द दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। कई जिलों में एक से अधिक वन प्रभाग हैं, जबकि “एक जिला, एक प्रभाग” के सिद्धांत पर फिलहाल चर्चा जारी है। अंतिम निर्णय जनहित को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।विभागीय स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम में वन अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रभागीय वन अधिकारी आशुतोष सिंह, दर्जा राज्यमंत्री श्याम नारायण पांडे, नगरपालिका अध्यक्षा प्रेमा पांडे, डॉ. तेजस्विनी अरविंद पाटिल, रेंजर बृजमोहन टम्टा, हिमालय सिंह टोलिया और चंद्रशेखर जोशी सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
डीएफओ कार्यालय परिसर में प्रमुख वन संरक्षक (HOFF) उत्तराखंड रंजन कुमार मिश्र की अध्यक्षता में ‘प्रभाग दिवस’ का हुआ आयोजन

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