April 23, 2026

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बातों-बातों में : मीना बाज़ार

बातों-बातों में : मीना बाज़ार
भगवत प्रसाद पांडेय
लोहाघाट।
आजकल लोहाघाट का मीना बाज़ार एक बार फिर चर्चा में है—इस बार ‘वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था’ को लेकर। लोग रोज़मर्रा की बातचीत में जब इस बाज़ार का नाम लेते हैं, तो शायद नई पीढ़ी यह नहीं जानती कि मीना बाज़ार नाम की कहानी कितनी दिलचस्प है।ब्रिटिश शासनकाल में, लगभग सन् 1839-40 के आस-पास, अंग्रेज़ शासक लोहाघाट के प्राकृतिक सौंदर्य और स्वास्थ्यवर्धक वातावरण से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने फर्नहिल, ज्योड़ियां, एबटमाउंट और लोहाघाट को अपने आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया। देवदार के घने जंगलों से घिरी इस भूमि को अंग्रेज़ सरकार ने चाय बागान के लिए मिस्टर हैंसी नामक अंग्रेज़ को ‘फ्री सैंपल एस्टेट’ के रूप में दिया, जो बाद में मिस्टर टलक ब्रे के स्वामित्व में आई और यही क्षेत्र “टलक ब्रे एस्टेट” कहलाया।
इसी समय यहाँ एक सैन्य छावनी भी बनी। वर्तमान राजकीय चिकित्सालय के आसपास बैरकें बनाई गईं और पाटन-पाटनी चाँदमारी क्षेत्र में सैनिक अभ्यास होते थे। कर्नल रैक के अधिकारी का आवास आज के उपजिलाधिकारी आवास के रूप में जाना जाता है। तहसील भवन के पास कभी घोड़ों के अस्तबल हुआ करते थे, जिनके अवशेष कुछ वर्ष पूर्व तक देखे जा सकते थे।लोहाघाट में अंग्रेज़ों के अनेक बंगले थे—कई अब इतिहास की बात हो गए, पर कुछ आज भी अपनी पुरानी भव्यता सँभाले हुए हैं। इन्हीं में से एक विशेष बंगले में रहती थीं मीना मैकडोनाल्ड, जिन्हें लोग स्नेह पूर्वक “मीना दीदी” कहा करते थे। अंग्रेज़ों के भारत छोड़ने के बाद भी मीना दीदी और उनके भाई टिक्का साहब यहीं रह गए। टलक ब्रे एस्टेट की ज़मीन पर उनकी पावर ऑफ अटॉर्नी थी, और 1985 तक उन्होंने यहाँ काफ़ी भूमि बेची। प्रशासनिक रोक लगने के बावजूद लोग उनसे “मीना दीदी, मीना दीदी” कहते हुए ज़मीन लेने जा पहुँचे। धीरे-धीरे वहीं एक छोटा सा बाज़ार बस गया, जो आगे चलकर उनके नाम पर “मीना बाज़ार” कहलाया।1992 में मीना मैकडोनाल्ड का निधन हो गया। हर साल 25 दिसंबर—क्रिसमस डे पर उनके उस बंगले में रौनक रहती थी। लोग शुभकामनाएं देने आते, मीना दीदी सभी को केक खिलातीं, बच्चों को उपहार देतीं और पूरे माहौल को अपने अपनत्व से भर देतीं।आज जब लोहाघाट की सड़कों पर ट्रैफिक नियमों की चर्चा चल रही है, तो “मीना बाज़ार” का नाम एक बार फिर लोगों की ज़ुबान पर है—जैसे इतिहास अपने आप को याद दिलाने लौटा हो।

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