April 23, 2026

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एनएचएम चयन प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार के आरोप, पारदर्शिता पर उठे सवाल परिणाम घोषित करने में ही लगा दिए 3 महीने

एनएचएम चयन प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार के आरोप, पारदर्शिता पर उठे सवाल परिणाम घोषित करने में ही लगा दिए 3 महीने
चंपावत, संवाददाता।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 16 पदों के लिए तीन और चार अक्टूबर को हुए साक्षात्कार के परिणाम तीन माह बाद घोषित किए गए हैं। परिणाम जारी होते ही चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
विभाग ने नौ पदों पर चयन परिणाम घोषित किए हैं, लेकिन पहले ही दिन प्रक्रिया पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप लगने शुरू हो गए हैं।पूर्व ग्राम प्रधान बेड़ाबेडवाल मीनाक्षी जोशी ने परामर्शदाता (परिवार नियोजन) पद पर हुई चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि विभाग ने एमएसडब्ल्यू व समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री के साथ अनुभव प्रमाण पत्र, वेतन पर्ची और पासबुक की प्रति मांगी थी। उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए, फिर भी उनका चयन नहीं हुआ।मीनाक्षी जोशी का कहना है कि चयन प्रक्रिया में परिवारवाद को बढ़ावा दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक ऐसे अभ्यर्थी चयनित किए गए हैं, जिनके परिजन पहले से एनएचएम में कार्यरत हैं। उदाहरण के तौर पर, प्रियंका पंत का चयन दो पदों पर हुआ है, जबकि उनके पति एनएचएम में पहले से सेवा दे रहे हैं। इसी तरह तनुजा जोशी का चयन किया गया है, जिनके पति भी जिला चिकित्सालय में एनएचएम के माध्यम से कार्यरत हैं।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कुछ पदों पर केवल दो-दो अभ्यर्थियों का ही साक्षात्कार हुआ, जबकि मानक के अनुसार एक पद पर कम से कम तीन अभ्यर्थियों का चयन होना चाहिए था।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे उम्मीदवार भी साक्षात्कार में शामिल किए गए, जिन्हें कंप्यूटर टाइपिंग नहीं आती या जिनके प्रमाण पत्र अपूर्ण हैं।मीनाक्षी ने सीएमओ से मांग की है कि चयनित अभ्यर्थियों की योग्यताओं और प्रमाण पत्रों की जांच किसी स्वतंत्र विभागीय कमेटी से कराई जाए।वहीं, मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. देवेश चौहान ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में गठित छह सदस्यीय कमेटी के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई है।

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