मानव–वन्यजीव संघर्ष पर काबू पाने को डीएम ने स्वीकृत किए ₹22.40 लाख
चम्पावत, 20 दिसंबर।
जनपद में बढ़ती मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने बड़ी पहल की है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने वन विभाग को आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता के लिए ₹22 लाख 40 हजार की धनराशि स्वीकृत की है। यह राशि राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के क्षमता विकास मद से जारी की गई है।जिलाधिकारी का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के साथ ही रेस्क्यू टीमों को आधुनिक संसाधनों से सशक्त बनाना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
वन विभाग को मिलेंगे आधुनिक उपकरणप्रभागीय वनाधिकारी, चम्पावत ने जिलाधिकारी के समक्ष उपकरणों की मांग रखी थी, जिसमें 5 गुलदार पकड़ने के पिंजरे (₹7.50 लाख), 2 बाघ पकड़ने के पिंजरे (₹4.00 लाख), 5 ततैया रेस्क्यू सूट (₹1.50 लाख), ट्रेंक्यूलाइजिंग गन दवाइयों सहित (₹4.00 लाख), 2 भालू पकड़ने के पिंजरे (₹4.00 लाख) तथा 7 वाइल्डलाइफ स्टोर किट (₹1.40 लाख) शामिल थे।
संकटग्रस्त क्षेत्रों में होगी त्वरित कार्रवाईधनराशि स्वीकृत होने के बाद अब वन विभाग को आधुनिक उपकरणों की सुविधा मिल सकेगी, जिससे भीड़भाड़ या ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों के घुसने की घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सकेगी। पिंजरों और ट्रेंक्यूलाइजिंग गन से वन्यजीवों को सुरक्षित पकड़ा कर आबादी वाले इलाकों से दूर छोड़ा जा सकेगा। ततैया रेस्क्यू सूट और वाइल्डलाइफ किट से रेस्क्यू टीम की सुरक्षा और कार्यकुशलता दोनों बढ़ेगी।
तीन स्तरों पर होगा लाभ
जिलाधिकारी ने कहा कि इस पहल से जन–धन की सुरक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में शांति एवं भरोसा, और वन्यजीव संरक्षण — तीनों उद्देश्यों की पूर्ति एक साथ होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आधुनिक उपकरणों के प्रयोग से मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी और प्रशासन की प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत होगी।

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