April 24, 2026

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“बड़े साहब का दौरा है, हमारी नौकरी का सवाल है

वीआईपी कल्चर पर सवाल: मुख्य सचिव के दौरे से पहले चंपावत और टनकपुर में साफ-सफाई की हड़बड़ी
चंपावत।
मुख्य सचिव के दौरे से ठीक पहले चंपावत मुख्यालय और टनकपुर क्षेत्र में प्रशासन अचानक अलर्ट मोड में दिखा। आमतौर पर किसी वीवीआईपी या बड़े नेता के आगमन पर सड़क से लेकर सफाई तक जो काम महीनों तक लटके रहते हैं, वे रस्म अदायगी की तर्ज पर जल्दबाजी में शुरू कर दिए गए। टनकपुर में नगर को चमकाने की कोशिश में कूड़े के ढेरों को हरे पर्दों से ढक दिया गया, ताकि गंदगी बाहर से नजर न आए।
वहीं चंपावत कलेक्ट्रेट रोड पर लोगों का आरोप है कि धूप में बंधी एक गाय को भी नगर पालिका के कर्मचारियों ने यह कहकर हटवा दिया कि “बड़े साहब का दौरा है, हमारी नौकरी का सवाल है।”इस मामले पर नगर पालिका चंपावत के ईओ भरत त्रिपाठी का कहना है कि केवल आवारा मवेशियों को हटाने के निर्देश दिए गए थे। उधर जिला पंचायत के कर्मचारी भी मुख्य सचिव के कार्यक्रम को लेकर काफी सक्रिय दिखे और लोहाघाट से चंपावत के बीच मजदूर लगाकर विशेष सफाई अभियान चलाया गया। सोचने की बात यह है कि क्या जिला पंचायत द्वारा नियमित रूप से यह अभियान चलाया जाता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े विभागों ने भी पाला प्रभावित इलाकों में चुना डालने के काम को तेज कर दिया, ताकि सड़कें दुरुस्त दिखाई दें। पुलिस विभाग ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के नाम पर कई स्थानों पर वाहनों को रोका, जिससे आम यात्रियों को देरी और असुविधा का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का काम जनता की रोजमर्रा की परेशानियां दूर करना है या केवल वीआईपी मूवमेंट से पहले दिखावटी सफाई और मरम्मत करना। वीआईपी कल्चर पर देशभर में उठ रही आपत्तियों और बहस के बीच चंपावत और टनकपुर की ये तस्वीरें फिर से यही सवाल खड़ा करती हैं कि हमारे देश में वीआईपी कल्चर आखिर कब खत्म होगा

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