April 24, 2026

आम जनता की आवाज

सच का सारथी

Dukan Ad
Dukan Ad

वीर शहीद शंकर दत्त राय स्मारक और प्रतिमा का विधायक खुशाल सिंह अधिकारी ने किया लोकार्पण

वीर शहीद शंकर दत्त राय स्मारक और प्रतिमा का लोकार्पण

लोहाघाट (संवाददाता)। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के पावन अवसर पर ग्राम रायनगर चौड़ी (लोहाघाट) में मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीद शंकर दत्त राय की स्मृति में निर्मित स्मारक एवं प्रतिमा का लोकार्पण शनिवार को विधायक  खुशाल सिंह अधिकारी ने किया।

इस दौरान स्मारक स्थल राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा रहा। विशिष्ट अतिथि ब्लॉक प्रमुख  महेन्द्र ढेक एवं जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राजकीय महाविद्यालय लोहाघाट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और पूर्व सैनिक उपस्थित रहे। समस्त जनसमूह ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।कार्यक्रम के दौरान श्री नरेश राय द्वारा प्रस्तुत शहीद की शौर्य गाथा ने सभी को भावविभोर कर दिया।

वहीं तीलू रौतेली पुरस्कार विजेता शांभवी मुरारी की वीर रस से ओत-प्रोत कविता ने वातावरण को देशभक्ति से सराबोर कर दिया।इस मौके पर विधायक  खुशाल सिंह अधिकारी ने कहा, “शहीद शंकर दत्त राय का जीवन साहस, समर्पण व राष्ट्रभक्ति की अप्रतिम मिसाल है।

मातृभूमि की रक्षा हेतु उनके अद्वितीय बलिदान को सदैव स्मरण किया जाएगा।”शहीद के छोटे भाई  कमल राय ने भावुक होकर कहा कि वे आज भी अपने बड़े भाई के साये को साथ महसूस करते हैं।

उन्होंने सेना, जिला प्रशासन और क्षेत्रवासियों का सहयोग के लिए आभार प्रकट किया।जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने शहीद की माता लक्ष्मी देवी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

उन्होंने कहा, “ये हम सबका सौभाग्य है कि हम ऐसे वीर सपूत की धरती पर खड़े हैं, जिसने राष्ट्र की रक्षा हेतु अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। शहीदों के बलिदान से ही देश की अखंडता और स्वाभिमान सुरक्षित है।”शहीद शंकर दत्त राय 15 जून 1970 को जन्मे। 17 वर्ष की आयु में कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हुए। उन्होंने ऑपरेशन पवन के तहत श्रीलंका एवं ऑपरेशन राइनो में असम में सेवा दी।

ऑपरेशन रक्षक के दौरान भारत-पाक सीमा पर तैनाती के समय 21 जुलाई 1996 को तीन आतंकवादियों को ढेर किया। गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद 22 जुलाई 1996 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया।कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी कृष्णा नाथ गोस्वामी, 9 कुमाऊं रेजिमेंट व पूर्व सैनिक, एनसीसी कैडेट्स, जनप्रतिनिधि, ग्रामीण एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

शेयर करे