June 9, 2026

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मां बाराही धाम में 5 अगस्त से शुरू होकर 16 अगस्त तक चलेगा मेला एसडीएम ने मेले की तैयारियों की समीक्षा की

पाटी की एसडीएम डांगर ने तैयारियों की समीक्षा की, कहा-आस्था के मेले में श्रद्धालुओं को मिले अधिकतम सुविधाएं

चंपावत/देवीधुरा। मां वाराही धाम देवीधुरा में फल-फूलों से खेली जाने वाली बगवाल इस बार 9 अगस्त (रक्षाबंधन के दिन) को खेली जाएगी। आज 2 अगस्त को वाराही मंदिर परिसर में बैठक ले पाटी की एसडीएम नीतू डांगर ने मेले की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सुरक्षा सहित सभी जरूरी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। उन्होंने आस्था के इस मेले में श्रद्धालुओं को अधिकतम सुविधा देने के लिए पुख्ता प्रबंध करने के निर्देश दिए। सड़कों की मरम्मत, पेयजल, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य, साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था सहित मेले से संबंधित सभी कार्यो को अगले 2 दिन में पूरा करने के निर्देश दिए।

धर्म, मान्यता, पंरपरा और संस्कृति की अदभुत छटा बिखेरना वाला बगवाली मेला 5 अगस्त से शुरू होकर 16 अगस्त तक चलेगा। मेला क्षेत्र को 5 सेक्टरों में बांटा जाएगा, ताकि हर सेक्टर में सुरक्षा, पार्किंग, सफाई और भीड़ नियंत्रण की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। भीड़ प्रबंधन, नियंत्रण कक्ष की स्थापना, चिकित्सा इकाइयों की तैनाती, अग्निशमन इकाई, जलापूर्ति, बैरिकेडिंग, सफाई कर्मियों की तैनाती, प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी आदि व्यवस्थाओं को माइक्रो प्लानिंग के जरिए कराया जा रहा है। स

मेला क्षेत्र में सुरक्षा का पुख्ता बंदोबस्त किया जाएगा। मेला क्षेत्र में महिला और खुफिया पुलिस भी तैनात रहेंगी। रोड साइड पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करते हुए यातायात को सुगम बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बैठक में देवीधुरा मंदिर समिति के सदस्य, पीठाचार्य पंडित र्कीति बल्लभ जोशी. जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल, जिला प्रतिनिधि, पुलिस सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कार्मिक मौजूद थे।
साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था सहित मेले से संबंधित सभी कार्या को अगले 2 दिन में पूरा करने के निर्देश दिए।

धर्म, मान्यता, पंरपरा और संस्कृति की अदभुत छटा बिखेरना वाला बगवाली मेला 5 अगस्त से शुरू होकर 16 अगस्त तक चलेगा। मेला क्षेत्र को 5 सेक्टरों में बांटा जाएगा, ताकि हर सेक्टर में सुरक्षा, पार्किंग, सफाई और भीड़ नियंत्रण की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। भीड़ प्रबंधन, नियंत्रण कक्ष की स्थापना, चिकित्सा इकाइयों की तैनाती, अग्निशमन इकाई, जलापूर्ति, बैरिकेडिंग, सफाई कर्मियों की तैनाती, प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी आदि व्यवस्थाओं को माइक्रो प्लानिंग के जरिए कराया जा रहा है।
चारों खाम (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग) सहित कुल सात थोकों के योद्धा रक्षाबंधन के दिन पूजा-अर्चना के बाद फल-फूलों से बगवाल खेलते हैं। माना जाता है कि पूर्व में यहां नरबलि दिए जाने का रिवाज था, लेकिन जब चम्याल खाम की एक वृद्धा के एकमात्र पौत्र की बलि के लिए बारी आई, तो
वंशनाश से बचने के लिए बुजुर्ग महिला ने मां बाराही की तपस्या की। देवी मां के प्रसन्न होने के बाद बगवाल की यह परंपरा शुरू हुई। तभी से बगवाल का सिलसिला चल रहा है।

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