चंपावत। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 50% महिला आरक्षण होने के बाद चंपावत जिले की विभिन्न 15 सीटों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की है।
इन 15 सीटों में 15 महिलाएं ऐसी हैं जो एमसीए एमबीए और बीटेक स्नातक, स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अधिकांश तौर पर देखा जाता है की महिलाएं चुनाव लड़ती हैं और जीत भी जाती हैं लेकिन वह सिर्फ एक मोहर बनकर रह जाती हैं । सही मायनों में महिला आरक्षण तभी सफल हो पाएगा जब महिलाएं अपने पति पिता और भाई के सहारे के बिना स्वयं प्रतिनिधित्व करें ।
चंपावत जिले की 15 सीटों में शिक्षित ही नहीं बल्कि उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाएं दावेदारी कर रही हैं। जिसमें अनीता महर बीटेक कर चुकी हैं और चुनावी मैदान में हैं। इसी तरह ममता पत्नी कमल किशोर के पास एमबीए एमसीए की डिग्री है।
वहीं पोस्ट ग्रेजुएट महिलाओं में किरन देवी,निर्मला महराना, सुष्मिता फर्त्याल, आशा अधिकारी बबीता देवी, मनीषा कालाकोटी, पूजा भट्ट, सुनीता जोशी, पूजा भी जिला पंचायत सदस्य की दावेदार हैं। ममता मौनी, हिमानी बोहरा, सरस्वती चंद ने स्नातक किया है और वह भी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रही हैं। शिक्षित और योग्य महिलाएं अगर जीत कर आती हैं तो पंचायत में महिला सशक्तिकरण को तो बल मिलेगा साथ ही विकास की नई कहानी भी गढ़ी जा सकती है।
ऐसी महिला प्रत्याशी चुनें, जो फैसले ले सके। अपने पति, भाई अौर बच्चों से ऊपर उठकर हर नागरिक के बारे में सोचे। क्षेत्र के विकास के लिए मुद्दे उठा सके। हर वर्ग के लोगों के साथ सीधा संपर्क कर सके। किसी की कठपुतली नहीं बने। शिक्षित हो, बेबाक हो, कर्मठ हो, निर्णायक हो।

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