रीठा साहिब।
रीठा साहिब गुरुद्वारे में आज 10 जून को मुख्य जोड़ मेला हुआ। सिख समागम में जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल- के नारों की गूंज रही। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से आए 35 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने लधिया रतिया नदी के संगम में स्नान करने के बाद गुरुद्वारे में शीश नवाया। श्री गुरुग्रंथ साहिब के पाठ की लड़ी शुरू होने के साथ नानकमत्ता सहित विभिन्न स्थलों से आए जत्थे के प्रतिनिधियों ने गुरुग्रंथ साहिब की अमृतवाणी के अलावा रीठा साहिब गुरुद्वारे के इतिहास की जानकारी दी। सोमवार से शुरू अखंड सबद-कीर्तन अनवरत जारी है। दरबार साहिब में सिख समागम को संबोधित किया कहा गया कि सेवा और बलिदान सिख धर्म की मुख्य खूबी है। इस स्थान में सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव जी ने आध्यात्मिक शक्ति से रीठे की कडुवाहट में मिठास भरकर दुनिया को मिलकर रहने का संदेश दिया। दूरदराज से आए जत्थेदारों ने भी संगत को संबोधित किया। दिल्ली कार सेवा प्रमुख बाबा बचन सिंह, बाबा सुरेंद्र सिंह. बाबा अजीत पाल सिंह, गुरुद्वारा प्रबंधक बाबा श्याम सिंह आदि संतों ने सिख धर्म के त्याग, सेवा और सत्कार की भावना को बनाए रखने की सीख दी। मेले के चलते रीठा साहिब में खूब चहलपहल रही। तीन दिनी जोड़ मेले का समापन कल 11 जून को होगा। जोड़ मेले के चलते जगह-जगह लंगर लगे हैं। जहां बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री लंगर छक रहे हैं

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