बचपन से ही बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना जरूरी : स्वामी चिदानंद सरस्वती
हरिद्वार। भूपतवाला में आयोजित राज्य स्तरीय संस्कृत महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु, शांति दूत एवं परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज (मुनि जी) ने चम्पावत के नशा हटाओ-जीवन बचाओ अभियान को अपना समर्थन दिया। उन्होंने अभियान के संयोजक एवं राजकीय इंटर कॉलेज सिप्टी, चम्पावत के संस्कृत प्रवक्ता सामश्रवा आर्य के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के शरीर को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि उसके विवेक, संस्कार, परिवार और भविष्य को भी बर्बाद कर देता है। नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल नारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि बचपन से ही बच्चों और विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना होगा। इसके साथ ही उनमें नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का विकास करना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक सामश्रवा आर्य द्वारा शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए चलाया जा रहा यह अभियान सराहनीय है। ऐसे प्रयास युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में स्वामी चिदानंद सरस्वती ने शिक्षक सामश्रवा आर्य के इस नैतिक एवं सामाजिक अभियान की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर पर संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. विनय विद्यालंकार, संस्कृत शिक्षा के उपनिदेशक डॉ. वाजश्रवा आर्य, डॉ. विजय त्यागी, डॉ. सुशील कुमार त्यागी, सतीश चंद्र जोशी एवं वेदप्रकाश पंत सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।





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