August 13, 2026

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दो सरकारी अस्पतालों के बाद निजी अस्पताल पहुंची गर्भवती, परिजनों ने इलाज पर उठाए सवाल

दो सरकारी अस्पतालों के बाद निजी अस्पताल पहुंची गर्भवती, परिजनों ने इलाज पर उठाए सवाल

चंपावत। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। चंपावत के चौकी गांव की एक गर्भवती महिला को जिला अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद हल्द्वानी के सरकारी अस्पताल और अंततः खटीमा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस मामले में परिजनों ने उपचार प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि जिला अस्पताल प्रशासन ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है।

जानकारी के अनुसार, चौकी गांव निवासी गीता बोहरा (22), पत्नी सागर सिंह बोहरा को तीन दिन पहले प्रसव संबंधी जांच के लिए जिला अस्पताल चंपावत में भर्ती कराया गया था। वह दो दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहीं। परिजनों का आरोप है कि 26 जून की रात उनकी तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद गर्भस्थ शिशु की धड़कन कम होने की बात कही और उन्हें एंबुलेंस से हायर सेंटर रेफर कर दिया।

परिजनों के मुताबिक, हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में जांच के दौरान शिशु की धड़कन सामान्य पाई गई। वहां चिकित्सकों ने प्रसव की संभावित तिथि जुलाई माह बताई। इसके बाद परिजनों ने बेहतर इलाज के उद्देश्य से शनिवार को गीता बोहरा को खटीमा के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया।

परिजनों का कहना है कि दोनों सरकारी अस्पतालों में मिले अलग-अलग चिकित्सकीय आकलन से वे असमंजस में हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    जिला अस्पताल का पक्ष

जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि गर्भवती का उपचार पूरी चिकित्सकीय प्रक्रिया और मानकों के अनुसार किया गया। मरीज की स्थिति को देखते हुए एहतियातन हायर सेंटर रेफर किया गया था। अस्पताल प्रशासन ने उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही से इनकार किया है।

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