June 8, 2026

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सरयू लिफ्ट पेयजल परियोजना को लेकर BJP-कांग्रेस में श्रेय लेने की होड़

सरयू लिफ्ट पेयजल परियोजना को लेकर BJP-कांग्रेस में श्रेय लेने की होड़
चम्पावत, 16 दिसंबर — लंबे इंतजार और आम जनता के लगातार आक्रोश के बाद आखिरकार लोहाघाट नगर के लिए बहुप्रतीक्षित सरयू लिफ्ट पेयजल परियोजना को स्वीकृति मिल गई है। परियोजना की मंजूरी मिलते ही अब भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में लोहाघाट टाउन पम्पिंग वाटर सप्लाई स्कीम को मंजूरी दी गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत 84.44 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।वर्ष 1980 में निर्मित मौजूदा जल वितरण प्रणाली अब पूरी तरह जीर्ण हो चुकी है और लगभग 44 वर्ष पुराने होने के कारण अपनी उपयोगी आयु पूरी कर चुकी है। नगर की करीब 14,561 आबादी को इस समय प्रतिदिन की मांग के अनुरूप पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
सरयू लिफ्ट परियोजना की मांग पिछले दो दशकों से जारी है। कांग्रेस सरकार के समय मंत्री रहे महेंद्र सिंह महरा के दौर से ही इस योजना की बात जोर पकड़ती रही,लोहाघाट के भाजपा से पूर्व विधायक पूरन फर्त्याल ने सरयू लिफ्ट परियोजना को लेकर कई बार आवाज उठाई मगर इसे अब जाकर मंजूरी मिल सकी है।
कांग्रेस विधायक खुशाल सिंह अधिकारी ने कहा कि जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनकी पहली मुलाकात हुई, तब उन्होंने सरयू लिफ्ट परियोजना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने तत्काल जिलाधिकारी को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने कहा कि जो भी योजनाएं विधायकों से मांगी गई थीं, उसमें उन्होंने इस परियोजना को प्राथमिकता दी थी।
वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सुभाष बगौली और अन्य भाजपा नेताओं ने भी योजना को स्वीकृति मिलने पर मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया और मिष्ठान वितरण कर खुशी जताई। गोविंद वर्मा ने कहा कि पिछले 15 सालों से वह लगातार सरयू लिफ्ट परियोजना को लेकर संघर्ष कर रहे हैं कई बार प्रदेश स्तर पर और मुख्यमंत्री को इसको लेकर ज्ञापन दे चुके हैं आज मुख्यमंत्री धामी ने नगर वासियों को यह सौगात दी है।
बताया जा रहा है कि मंगलवार को भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने लोहाघाट में जनसंपर्क कर अपनी पीठ थपथपाई। इधर, लोहाघाट संघर्ष समिति के संरक्षक एवं यूकेडी नेता पहलाद सिंह मेहता ने कहा कि परियोजना की स्वीकृति किसी भी राजनीतिक दल की देन नहीं है, बल्कि यह जनता के संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति ने लोहाघाट के लोगों के साथ मिलकर लगातार आंदोलन किया, जिसके बाद अंततः सरकार को यह योजना मंजूर करनी पड़ी।

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