मानदेय वृद्धि और पेंशन की मांग को लेकर उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन का प्रदर्शन, सरकार को 22 नवंबर का अल्टीमेटम
चम्पावत ।
उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर एक बार फिर आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। अपनी मांगों के समर्थन में संगठन ने चम्पावत में मोटर स्टेशन से कलेक्ट्रेट तक एक जोरदार रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट परिसर को आंदोलन के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किए जाने के कारण पुलिस व प्रशासन ने मुख्य द्वार बंद कर दिया था, जिसके बाद एडीएम केएन गोस्वामी ने मौके पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं का ज्ञापन लिया।
सरकार पर लगाया सौतेला बर्ताव का आरोप
संगठन की जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार उनके साथ सौतेला बर्ताव कर रही है। उनके काम का न तो सम्मान हो रहा है और न ही उन्हें उनके काम का उचित दाम मिल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब वे चुप नहीं बैठेंगी और आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। साथ ही घोषणा की गई कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो 22 नवंबर को प्रदेशभर की आशा कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगी।
आशा वर्कर्स की 7 सूत्रीय प्रमुख मांगें:
* 1. मानदेय में वृद्धि की जाए।
* 2. न्यूनतम वेतन, कर्मचारियों का दर्जा और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की व्यवस्था की जाए।
* 3. रिटायरमेंट के समय 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि प्रदान की जाए।
* 4. एनएचएम (NHM) का बजट बढ़ाया जाए और एनजीओ (NGO) की भूमिका को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
* 5. आशा कार्यकर्ताओं की छंटनी पर तुरंत रोक लगाई जाए।
* 6. प्रदेश के सभी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पड़े पदों को तत्काल भरा जाए।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा, पद्मा प्रथोली, चंपा राय, ब्लॉक अध्यक्ष रीता सिंह, रूकमणि जोशी, हेमा जोशी, विनीता पांडेय, ज्योति उपाध्याय, धनी मेहता, ममता बिष्ट, पुष्पा बोहररा, तनुजा पांडेय और कमला जोशी सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।

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