September 19, 2026

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मां झूमाधुरी के जयकारों से गूंजी झूमाधुरी की चोटी रस्सों के सहारे खड़ी चढ़ाई पार कर मंदिर पहुंचे मां भगवती और मां कालिका के रथ

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मां झूमाधुरी के जयकारों से गूंजी झूमाधुरी की चोटी
रस्सों के सहारे खड़ी चढ़ाई पार कर मंदिर पहुंचे मां भगवती और मां कालिका के रथ

लोहाघाट।
मां झूमाधुरी के जयकारों से शनिवार को झूमाधुरी की चोटी गूंज उठी। ग्राम सभा पाटन पाटनी और राईंकोट महर गांव से उठे मां भगवती और मां कालिका के देवी रथों को खड़ी चढ़ाई पार कर रस्सों के सहारे ऊंची चोटी पर स्थित मां झूमाधुरी मंदिर पहुंचाया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने देवी रथों के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

खुशनुमा मौसम के बीच सुबह से ही दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। देवी रथों के मंदिर पहुंचने के दौरान श्रद्धालुओं में रस्से खींचने को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। महिलाएं मां के जयकारे लगाते हुए देव आधारित मंगल गीत गा रही थीं। रथों के मंदिर पहुंचते ही पूरी पहाड़ी मां के जयकारों से गूंज उठी और मंदिर परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं बची।

विधि-विधान से सजाने के बाद पाटन पाटनी गांव का मां भगवती का रथ पालदेवती मंदिर से दोपहर 2:37 बजे रवाना हुआ। इसके बाद राईंकोट महर गांव से मां भगवती और मां कालिका के रथ को झूमाधुरी मंदिर ले जाया गया। देवी रथों में सवार देव डांगरों ने श्रद्धालुओं को चंवर गाय की पूंछ से स्पर्श कराकर और अक्षत देकर आशीर्वाद दिया। रास्ते में जगह-जगह महिलाओं ने अक्षत और पुष्प से रथों की पूजा-अर्चना की।

पाटन पाटनी के देवी रथ में मां भगवती के रूप में विनीत पाटनी और धन सिंह पाटनी सवार थे। वहीं राईंकोट महर के देवी रथ में मां भगवती के रूप में दान सिंह और मां कालिका के रूप में राधिका देवी सवार थीं। मंदिर में दिनभर पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। मंदिर की परिक्रमा के बाद परंपरा के अनुसार देवी रथों का विसर्जन किया गया।

मेला समिति अध्यक्ष मोहन पाटनी ने मेला आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया।

पुलिस के साथ युवाओं ने संभाली व्यवस्था

मेले को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए थानाध्यक्ष ओम प्रकाश के निर्देश पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। स्थानीय युवाओं ने भी पुलिस के साथ व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया।

मेले में जमकर हुई खरीदारी

झूमाधुरी मेले में रथों के गुजरने वाले मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक स्थानीय व्यापारियों के साथ ही दूर-दराज से पहुंचे व्यापारियों ने दुकानें सजाईं। महिलाओं और बच्चों ने मेले में जमकर खरीदारी की। मौसम अनुकूल रहने से व्यापारियों में भी उत्साह रहा। स्थानीय लोहकारों और बुनकरों ने अपने पारंपरिक उत्पादों की बिक्री की।

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