August 23, 2026

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भिंगराड़ा का पिरूल मॉडल अब अरुणाचल प्रदेश की नजर में

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भिंगराड़ा का पिरूल मॉडल अब अरुणाचल प्रदेश की नजर में

पिरूल से ऊर्जा और रोजगार के मॉडल का अध्ययन करने पहुंचे अरुणाचल प्रदेश स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. टागे टाकी

चम्पावत। पहाड़ों में जंगल की आग का बड़ा कारण माने जाने वाले पिरूल को रोजगार और ऊर्जा के संसाधन में बदलने का भिंगराड़ा मॉडल अब दूसरे राज्यों को भी आकर्षित करने लगा है। अरुणाचल प्रदेश स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. टागे टाकी और श्रीं टागे तागयो ने भिंगराड़ा पहुंचकर पाइन नीडल ब्रिकेटिंग प्लांट का निरीक्षण किया और इसकी कार्यप्रणाली की जानकारी ली।

यह परियोजना उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट) के वित्त पोषण से सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून द्वारा स्थापित की गई है। दौरे के दौरान डॉ. टागे टाकी ने पिरूल से ब्रिकेट तैयार करने की प्रक्रिया के साथ ही इसके पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों की जानकारी ली।

महिलाओं ने संभाली प्लांट की कमान

प्लांट के संचालन में स्थानीय महिलाओं की भूमिका ने डॉ. टाकी को खासा प्रभावित किया। महिलाएं पिरूल के संग्रह से लेकर ब्रिकेट निर्माण और प्लांट संचालन तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्होंने महिलाओं की पहल की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं स्थानीय संसाधनों के जरिए रोजगार पैदा करने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

अरुणाचल में अपनाने पर होगा विचार

दौरे के दौरान अरुणाचल प्रदेश में भी पाइन नीडल जैसे वन-आधारित बायोमास से ऊर्जा उत्पादन और रोजगार सृजन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। डॉ. टागे टाकी ने भिंगराड़ा मॉडल को अरुणाचल प्रदेश में अपनाने की संभावनाओं पर प्रयास करने की बात कही।

भिंगराड़ा की यह पहल अब केवल एक गांव तक सीमित नहीं रह गई है। पिरूल प्रबंधन, महिला सशक्तीकरण, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में यह पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। पिरूल से जंगलों में आग का खतरा कम करने के साथ ग्रामीणों की आय के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

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