चंपावत। खेतखेड़ा क्षेत्र में शारदा कॉरिडोर परियोजना के नाम पर कथित अवैध खनन का मामला सामने आया है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. मदन सिंह महर ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
डॉ. महर का आरोप है कि मानसून के दौरान भी नदी तल में भारी मशीनों से खनन किया जा रहा है, जबकि इस अवधि में खनन गतिविधियां प्रतिबंधित रहती हैं। उनका कहना है कि नदी से निकाली जा रही सामग्री को पूर्णागिरि रोड स्थित एक क्रशर प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि अनियमित खनन से शारदा नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव आ रहा है, जिससे आसपास के गांवों में कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। इससे स्थानीय लोगों की जान-माल और कृषि भूमि पर भी संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है।
डॉ. महर ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित ठेकेदार आवश्यक अनुमति के बिना खनन सामग्री का उत्खनन और परिवहन कर रहा है। साथ ही प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा और नदी तट संरक्षण के लिए कोई प्रभावी कार्य नहीं कराया जा रहा है।
उन्होंने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि शारदा नदी के अपस्ट्रीम क्षेत्र में पिछले लगभग 18 वर्षों से खनन प्रतिबंधित है। वहीं डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में भी मौसमी नियमों के तहत 30 मई से सभी खनन गेट बंद किए जा चुके हैं। इसके बावजूद मानसून के दौरान ऊपरी क्षेत्र में खनन जारी रहने पर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए हैं।
डॉ. महर ने जिलाधिकारी से खेतखेड़ा क्षेत्र में कथित अवैध खनन तत्काल बंद कराने, निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा प्रभावित गांवों की सुरक्षा के लिए बाढ़ एवं नदी संरक्षण कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वह पर्यावरण संरक्षण और जनहित में न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होंगे।


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