May 15, 2026

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कुमाऊँनी संस्कृति की जीवंत मिसाल बनी गौरव की बर्यात,अपनी बोली, अपनी परंपरा और नशा मुक्त विवाह से दिया समाज को संदेश

कुमाऊँनी संस्कृति की जीवंत मिसाल बनी गौरव की बर्यात

अपनी बोली, अपनी परंपरा और नशा मुक्त विवाह से दिया समाज को संदेश
संवाददाता चंपावत।
आधुनिक दौर में जहां विवाह समारोह दिखावे, डीजे, कॉकटेल और भव्य आयोजनों तक सीमित होते जा रहे हैं, वहीं चम्पावत मुख्यालय में वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पांडेय के ज्येष्ठ पुत्र गौरव पांडेय की बर्यात कुमाऊँनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों की अनूठी मिसाल बनकर सामने आई।
पूरे विवाह समारोह में कुमाऊँनी रीति-रिवाजों, वैदिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जिस आत्मीयता और गरिमा के साथ निभाया गया, उसने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
विवाह समारोह की शुरुआत ही अपनी मातृभाषा कुमाऊँनी में छपे आमंत्रण पत्र से हुई। पारंपरिक शैली में तैयार किए गए निमंत्रण पत्र सबसे पहले ईष्ट देवी-देवताओं एवं पूजा स्थलों में अर्पित किए गए। विवाह की प्रत्येक रस्म ‘शगुन आखर’ और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई।
हल्दी की रस्म में महिलाओं द्वारा रंग्याली पिछौड़ी ओढ़कर पारंपरिक लोकगीतों के साथ मंगल कार्य संपन्न किए गए। वहीं मेंहदी समारोह में आधुनिक कॉकटेल संस्कृति को पूरी तरह नकारते हुए भजन-कीर्तन और भक्तिमय वातावरण को प्राथमिकता दी गई। डीजे और तेज संगीत के स्थान पर पूरी रात भक्ति रस की धारा बहती रही, जिसमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे देर रात तक शामिल रहे।
बर्यात के प्रस्थान और स्वागत के दौरान कुमाऊँनी ढोल-दमाऊँ की गूंज के बीच छलिया नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। पानी परखने, भाभी द्वारा काजल लगाने और मां के दूध का फर्ज अदा करने जैसी पारंपरिक रस्मों को भी पूरी श्रद्धा और परंपरागत विधि से निभाया गया।

पाणिग्रहण संस्कार के दौरान धूलिघर, गोत्राचार, गोठको ब्या, फेरे, शय्यादान तथा लक्ष्मी-नारायण पूजा जैसे सभी वैदिक एवं पारंपरिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न कराए गए। विवाह भोज में भी स्थानीय संस्कृति की झलक देखने को मिली, जहां पारंपरिक रसोई में पंडितों द्वारा भट्ट की दाल, भात, खीर समेत कई स्थानीय व्यंजन तैयार किए गए।
महिला संगीत, पिठ्यां लगाने, दक्षिणा एवं उपहारों के पारंपरिक आदान-प्रदान तथा श्री सत्यनारायण कथा के साथ विवाह समारोह आगे बढ़ा। पांचवें दिन दुनगौन की रस्म, ईष्टदेव पंचबलिया में पूजा-अर्चना और देवी पाठ के साथ विवाह समारोह का विधिवत समापन हुआ।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अपनी बोली-भाषा में छपे आमंत्रण पत्र और कुमाऊँनी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के इस प्रयास की सराहना की।
उन्होंने परिजनों से वार्ता कर गौरव पांडेय की बर्यात को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताते हुए इसकी भूरी-भूरी प्रशंसा की।

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