20 देशों की यात्रा के बाद चम्पावत पहुँचे मोरक्को के उसफ़ान, चम्पावत को बताया स्वर्ग
चम्पावत जनपद का शांत, सुंदर और प्राकृतिक वैभव एक बार फिर अपनी ख़ूबसूरती के लिए चर्चा में है। इस बार वजह बने मोरक्को से आए यात्री उसफ़ान, जिन्होंने दुनिया के लगभग 20 देशों की यात्रा करने के बाद जब चम्पावत की धरती पर कदम रखा, तो यहाँ की खूबसूरती और सादगी ने उनका दिल जीत लिया।
लंबी विदेश यात्राओं और विभिन्न संस्कृतियों को करीब से देखने के बाद भी उसफ़ान का कहना है कि चम्पावत जैसा सुकून, प्राकृतिक संतुलन और आत्मिक शांति उन्हें कहीं और महसूस नहीं हुई। उन्होंने यहाँ के वातावरण को “धरती पर बसा स्वर्ग” बताते हुए कहा कि यह स्थान केवल देखने भर के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए है।
लोहाघाट के शशांक पाण्डेय से विशेष बातचीत में उसफ़ान ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने यूरोप, अफ्रीका और एशिया के कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया है, जहाँ आधुनिकता और भीड़भाड़ तो बहुत है, लेकिन चम्पावत ज़िले की तरह प्राकृतिक शुद्धता और सादगी नहीं। यहाँ की ताजी हवा, हरियाली से ढके पहाड़, दूर-दूर तक फैली हिमालय की श्रृंखलाएँ और शांत वातावरण मन को भीतर तक छू जाते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से यहाँ के लोगों की सरलता, अपनापन और मेहमाननवाज़ी की सराहना करते हुए कहा कि चम्पावत प्राकृतिक रूप से भी और मानवीय दृष्टि से भी बहुत समृद्ध है। यहाँ के लोग दिल से जुड़े हुए हैं और यही इस स्थान की सबसे बड़ी ताकत है।उसफ़ान ने यह भी बताया कि आज के समय में जब पूरी दुनिया शोर, प्रदूषण और भागदौड़ से जूझ रही है, ऐसे में चम्पावत जैसे स्थान मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन पर्यटन के क्षेत्र में यहाँ थोड़े और प्रयास करें, तो यह स्थान अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सकता है।
उन्होंने विदेशी पर्यटकों को संदेश देते हुए कहा कि जो लोग प्रकृति के असली रूप को देखना चाहते हैं, जो शांति और सुकून की तलाश में हैं, उन्हें एक बार चम्पावत जरूर आना चाहिए। यह स्थान उन्हें निराश नहीं करेगा, बल्कि जीवन भर के लिए यादगार अनुभव देगा।
चम्पावत ज़िले की इस सराहना ने स्थानीय लोगों में गर्व की भावना को बढ़ाया है, साथ ही यह भी साबित किया है कि छोटे-छोटे पहाड़ी कस्बों में छिपी प्राकृतिक धरोहर किसी भी बड़े और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल से कम नहीं है। जरूरत है तो बस इन्हें सही पहचान और उचित प्रचार-प्रसार देने की, ताकि दुनिया भर के लोग इस “छिपे हुए स्वर्ग” का आनंद ले सकें।
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मयंक पांडे

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