September 18, 2026

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कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को आखिरकार कुर्सी छोड़नी पड़ी, पहाड़ी लोगों के खिलाफ टिप्पणी के बाद चौतरफा घिर गए थे अग्रवाल

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वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री को सौंपा त्यागपत्र, विवादित टिप्पणी से चौतरफा निशाने पर थे अग्रवाल
देहरादून। पिछले कुछ सप्ताह से अपनी विवादित टिप्पणी से विपक्ष और राज्य आंदोलनकारियों के निशाने पर रहे उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को आखिरकार कुर्सी छोड़नी पड़ी। तमाम दबाव के बीच उन्होंने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसकी जानकारी उन्होंने पहले प्रेसवार्ता कर दी और फिर इसके बाद सीएम अवास पहुंचकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस्तीफा सौंपा।
चंपावत में राज्य आंदोलनकारी मंदीप ढेक ने कहा कि राज्य के पर्वतीय समाज के लोगों का दबाव काम आया और अंततः मंत्री को जाना ही पड़ा। उनका कहना है कि राज्य आंदोलन की भावना का मजाक उड़ाना और राज्य की अवधारणा से खिलवाड़ करना ठीक नहीं है।

प्रेमचंद अग्रवाल ने इससे पूर्व उन्होंने अपने राज्य आंदोलन में संघर्ष और योगदान को बताया। उन्होंने कहा कि जो उस वक्त बयान दिया था, उस पर उसी दिन सदन में स्पष्टीकरण भी दे दिया था। उनके भाव बिल्कुल गलत नहीं थे। गाली वाला शब्द भी उनके वक्तव्य से पहले का है। जो न तो पहाड़ के लिए कहा गया और न ही मैदान के लिए। वह पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। उनका जन्म उत्तराखंड में हुआ है। कुछ लोगों की ओर से सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाया गया। मैं भी आंदोलनकारी रहा हूं, लेकिन आज ये साबित करना पड़ रहा है कि हमने भी प्रदेश के लिए योगदान दिया है। लेकिन आज जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है उससे बहुत आहत हूं। इसलिए मुझे इस्तीफा देना पड़ रहा है।

बीते दिनों बजट सत्र के दौरान सदन में पहाड़ी लोगों के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी देने के बाद से लगातार उनका विरोध हो रहा था। तमाम संगठन और विपक्षी दल उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे थे। मंत्री अग्रवाल इस वक्त संसदीय कार्यमंत्री और वित्त मंत्री का पद संभाल रहे थे। इस्तीफे के एलान से पहले शहीद किया नमन कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल इस्तीफे का ए करने से पहले अपनी धर्मपत्नी के साथ मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में बने उत्तराखंड शहीद स्मारक पहुंचे थे।

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