April 16, 2026

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बाराही धाम में 8 मिनट तक खेली गई ऐतिहासिक बगवाल, देखें वीडियो ऐतिहासिक जानकारी के साथ

 जिले के देवीधुरा मां बाराही धाम  में आठ मिनट तक चली बगवाल
-बगवाल खेलने के दौरान 77 बगवाली वीर हुए चोटिल।
-300से अधिक रणबांकुरों ने किया बगवाल मेले में प्रतिभाग।
-कोरोना के कारण इस दफा सिर्फ 1000 स्थानीय दर्शकों की मौजूदगी।

चंपावत जिले के बाराहीधाम देवीधुरा में इस वर्ष विश्व प्रसिद्ध बगवाल युद्ध करीब आठ मिनट तक चला। इस दौरान चार खाम और सात थोकों के रणबांकुरों में से 77 बगवाली वीर चोटिल हो गए। इस वर्ष जहां कोरोना महामारी के कारण लगातार दूसरे वर्ष भी दर्शकों की संख्या बेहद कम रही, वहीं बगवाल युद्ध में 300से अधिक रणबांकुरों ने प्रतिभाग किया। सुबह दस बजे सबसे पहले गहरवाल खाम के योद्धाओं ने बाराही मंदिर की परिक्रमा की। उसके बाद लमगडिय़ा खाम के योद्धा मंदिर में पहुंचे। जबकि बालिक और चम्याल खाम के योद्धा सबसे अंत में मंदिर की परिक्रमा को पहुंचे। चारों खामों के मंदिर परिसर में स्थित खोलीखांड दुर्बाचौड़ मैदान में पहुंचने के बाद मंदिर के पुजारी के संकेत के बाद बगवाल युद्ध शुरू हो गया। इस दफा प्रशासन की सख्ती के कारण बगवाल मेले में दर्शकों की आवाजाही प्रतिबंधित होने के कारण बहुत कम लोग बगवाल देखने को पहुंचे। बाद में बगवाल युद्ध में चोटिल हुए लोगों का मंदिर परिसर में ही उपचार किया गया।
मां बाराही को खुश करने के लिए पौराणिक समय से देवीधुरा मंदिर में बग्वाल का आयोजन किया जाता है। पहले 4 खाम के बीच पत्थरों से बगवाल खेली जाती थी कुछ साल पहले हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बगवाल में फल और फूलों का भी प्रयोग किया जाने लगा।
बग्वाल बाराही मंदिर के प्रागण खोलीखाण में खेली जाती है। इसे चारों खामों के युवक और बुजुर्ग मिलकर खेलते हैं। लमगड़िया व बालिग खामों के रणबाकुरे एक तरफ जबकि दूसरी ओर गहड़वाल और चमियाल खाम के रणबाकुरे डटे रहते हैं। रक्षाबंधन के दिन सुबह रणबाकुरे सबसे पहले सज-धजकर मंदिर परिसर में आते हैं। देवी की आराधना के साथ शुरू हो जाता है अछ्वुत खेल बग्वाल। बाराही मंदिर में एक ओर मा की आराधना होती है दूसरी ओर रणबाकुरे बग्वाल खेलते हैं। दोनों ओर के रणबाकुरे पूरी ताकत व असीमित संख्या में पत्थर तब तक चलाते हैं जब तक एक आदमी के बराबर खून न गिर जाए। बताया जाता है कि पुजारी बग्वाल को रोकने का आदेश जब तक जारी नहीं करते तब तक खेल जारी रहता है। इस खेल में कोई किसी का दुश्मन नहीं होता है। पूरे मनोयोग से बग्वाल खेली जाती हैं। यह भी मान्यता है कि इस खेल में कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं होता है। किसी का सिर फूटता है तो किसी का माथा। अंत में सभी लोग गले मिलते हैं। कुछ घायलों को प्राथमिक उपचार दिया जाता है।

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