October 22, 2026

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बीके सामंत की आवाज में ‘मनैकि पीड़’ ने छुआ दिल, पहाड़ की लोकसंस्कृति को मिला नया अंदाज

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बीके सामंत की आवाज में ‘मनैकि पीड़’ ने छुआ दिल, पहाड़ की लोकसंस्कृति को मिला नया अंदाज

फिल्म ‘pyre’ (चिता)
के शीर्षक गीत में कुमाऊंनी लोकधुन की मिठास, गीत के भावपूर्ण बोल और पिक्चराइजेशन ने बढ़ाई खूबसूरती

चंपावत। कुमाऊंनी लोकसंगीत को अपनी खास आवाज से नई पहचान दिलाने वाले गायक बीके सामंत का नया गीत ‘मनैकि पीड़’ श्रोताओं का ध्यान आकर्षित कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई फिल्म पायरे (चिता) के इस शीर्षक गीत में पारंपरिक कुमाऊंनी लोकगीत को नए संगीत संयोजन के साथ पेश किया गया है। गीत में पहाड़ की लोकसंस्कृति, मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं की गहरी झलक देखने को मिलती है।

बीके सामंत और मान चड्ढा की आवाज में सजे इस गीत की खासियत इसकी लोकधुन, भावपूर्ण शब्द और प्रभावशाली प्रस्तुति है। पारंपरिक कुमाऊंनी गीत से प्रेरित इस रचना को आधुनिक अंदाज में लयबद्ध किया गया है, लेकिन इसकी मूल लोकभावना को बनाए रखने का प्रयास किया गया है। गीत के बोल जहां मन को छूते हैं, वहीं फिल्म के दृश्यों के साथ उनका तालमेल इसकी संवेदनशीलता को और गहरा बनाता है।

गीत का पिक्चराइजेशन भी इसकी खासियत है। फिल्म के दृश्य पहाड़ के जीवन और पात्रों की भावनाओं को प्रभावी ढंग से सामने लाते हैं। संगीत, गायकी और दृश्यांकन का मेल ‘मनैकि पीड़’ को केवल एक गीत नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा अनुभव बनाता है।

बीके सामंत इससे पहले भी अपने लोकप्रिय कुमाऊंनी गीतों के जरिए उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को व्यापक पहचान दिला चुके हैं। उनकी गायकी में पहाड़ की बोली, मिट्टी की खुशबू और लोकजीवन की सहजता महसूस होती है। उनके गीतों की लोकप्रियता ने कुमाऊंनी संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। ‘मनैकि पीड़’ में भी उनकी आवाज का भावपूर्ण अंदाज गीत को खास बनाता है।

पारंपरिक लोकधुनों को नए संगीत के साथ प्रस्तुत करने का यह प्रयास उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ‘मनैकि पीड़’ के बोल, संगीत और पिक्चराइजेशन मिलकर कुमाऊंनी लोकसंगीत की उस संवेदनशीलता को सामने लाते हैं, जो भाषा की सीमाओं से आगे बढ़कर सीधे दिल तक पहुंचती है।

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